नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर एक बार फिर शुक्रवार को विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला है। विपक्ष के नेताओं का कहना है कि भाजपा संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता खत्म करने में जुटी हुई है और उसे अपने हिसाब से चला रही है।
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नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर एक बार फिर शुक्रवार को विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला है। विपक्ष के नेताओं का कहना है कि भाजपा संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता खत्म करने में जुटी हुई है और उसे अपने हिसाब से चला रही है।
मुंबई में कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा, "अब लोगों का चुनाव आयोग पर कोई भरोसा नहीं रह गया है। चुनाव आयोग एक ऐसी संस्था की तरह काम करता है जो सरकार के हर आदेश के आगे सिर झुका देती है। असल में वे सरकार के नौकर बन गए हैं। आयोग अब कोई भी फैसला स्वतंत्र रूप से नहीं लेता है, बल्कि भाजपा के इशारे पर काम करता है। भाजपा सभी संवैधानिक संस्थाओं को खत्म कर रही है।"
वहीं, दिल्ली में आम आदमी पार्टी के विधायक गोपाल राय ने कहा, "जनता की मांग है कि ज्ञानेश कुमार को हटाओ और पूरी सरकार उन्हें बचाने में जुटी हुई है। आखिर क्या मजबूरी है इस मोदी सरकार की? ज्ञानेश कुमार को क्यों बचाने की जिद पर अड़ी हुई है।"
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा इंडिया ब्लॉक की याचिका पर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को नोटिस जारी करने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस मामले में जल्द फैसला आएगा।
गोपाल राय ने कहा, "देश आंदोलनरत है और इस पर जल्द न्याय चाहता है। काफी लंबे समय से सर्वोच्च न्यायालय में अर्जियां लगती रही हैं, लेकिन उसकी तारीख पड़ती रही है। मुझे उम्मीद है कि जल्द ही सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करके न्याय की गुहार पर तुरंत फैसला करेगा।"
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस बयान पर जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार हर मुद्दे पर संवाद के लिए तैयार है, गोपाल राय ने केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कहती कुछ है और करती कुछ और है।
उन्होंने कहा, "सरकार बात तो संवाद की कर रही है और काम दमन का कर रही है। हम तो यही चाहते हैं कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्वक आंदोलन के लिए जगह दी जाए। सरकार संवाद करे और संवाद करके इसका समाधान निकाले।"
--आईएएनएस
पीआईएम/वीसी
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