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भारत और जापान ने स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने पर जताई सहमति, नवाचार और डीप-टेक सहयोग को मिलेगा बढ़ावा


टोक्यो, 26 अगस्त (आईएएनएस)। भारत और जापान ने स्टार्टअप, डीप-टेक, नवाचार और एमएसएमई क्षेत्र में सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाने की प्रतिबद्धता जताई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को टोक्यो में आयोजित भारत-जापान स्टार्टअप गोलमेज बैठक में कहा कि पिछले एक दशक में लगभग 2.5 लाख स्टार्टअप्स के साथ भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है और जापानी निवेश तथा तकनीकी सहयोग के लिए भारत एक आकर्षक गंतव्य के रूप में उभरा है।

टोक्यो, 26 अगस्त (आईएएनएस)। भारत और जापान ने स्टार्टअप, डीप-टेक, नवाचार और एमएसएमई क्षेत्र में सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाने की प्रतिबद्धता जताई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को टोक्यो में आयोजित भारत-जापान स्टार्टअप गोलमेज बैठक में कहा कि पिछले एक दशक में लगभग 2.5 लाख स्टार्टअप्स के साथ भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है और जापानी निवेश तथा तकनीकी सहयोग के लिए भारत एक आकर्षक गंतव्य के रूप में उभरा है।

बैठक में दोनों देशों के वरिष्ठ सरकारी प्रतिनिधियों, निवेशकों, उद्योग जगत के नेताओं और स्टार्टअप संस्थापकों ने हिस्सा लिया। चर्चा का मुख्य फोकस प्रौद्योगिकी साझेदारी को मजबूत बनाने, निवेश को बढ़ावा देने और नवाचार-आधारित आर्थिक सहयोग के अगले चरण को गति देने पर रहा।

पीयूष गोयल ने कहा कि भारत का विशाल घरेलू बाजार, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित क्षेत्र में कुशल प्रतिभाओं का बड़ा आधार, मजबूत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और तेजी से विकसित होता नवाचार तंत्र जापानी कंपनियों के लिए बड़े अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि भारत और जापान की क्षमताएं एक-दूसरे की पूरक हैं और दोनों देश मिलकर भविष्य की तकनीकों में वैश्विक नेतृत्व स्थापित कर सकते हैं।

जापान में भारत की राजदूत नगमा मोहम्मद मलिक ने कहा कि दोनों देशों के बीच स्टार्टअप सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने बताया कि भारत-जापान पिचिंग सीरीज के माध्यम से अब तक 65 भारतीय स्टार्टअप्स को लगभग 100 जापानी कंपनियों से जोड़ा जा चुका है और इससे 30 से अधिक व्यावसायिक साझेदारियां स्थापित हुई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 222 सदस्यीय भारतीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी दोनों देशों के नवाचार तंत्र के बीच नए संबंध स्थापित करने का अवसर प्रदान कर रही है।

बैठक के दौरान पीयूष गोयल ने भारत-जापान स्टार्टअप सहयोग के लिए चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित एक नई रूपरेखा भी प्रस्तावित की, जिसमें जापान-भारत डीप-टेक कैपिटल कॉरिडोर की स्थापना का सुझाव दिया गया, जिसका उद्देश्य शुरुआती चरण के अनुसंधान, डीप-टेक नवाचार और व्यावसायीकरण के लिए दीर्घकालिक पूंजी उपलब्ध कराना है।

उन्होंने द्वि-दिशात्मक नवाचार सेतु का भी प्रस्ताव रखा, जिसके तहत दोनों देशों के विश्वविद्यालयों, इनक्यूबेटरों, अनुसंधान एवं विकास संस्थानों, प्रयोगशालाओं और परीक्षण सुविधाओं को आपस में जोड़ा जाएगा। इसके अलावा भारत की उत्पादन क्षमता और इंजीनियरिंग प्रतिभा को जापान की उन्नत विनिर्माण विशेषज्ञता के साथ जोड़ने तथा नियमित स्टार्टअप पिचिंग मंच स्थापित करने का सुझाव भी दिया गया, ताकि भारतीय उद्यमियों, जापानी कंपनियों, उद्यम पूंजी कोषों और रणनीतिक निवेशकों के बीच निरंतर संवाद बना रहे।

गोयल ने भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित लगभग 1 अरब डॉलर के दूसरे फंड ऑफ फंड्स का भी उल्लेख किया, जिसका विशेष ध्यान डीप-टेक कंपनियों को समर्थन देने पर रहेगा। उन्होंने जापानी निवेशकों से इस पहल में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।

जापानी प्रतिनिधियों ने भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम की परिपक्वता और तेजी से बढ़ती क्षमता की सराहना की। जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जाइका) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शोहेई हारा ने कहा कि यह साझेदारी दोतरफा लाभ की है। जापान अपनी तकनीकी विशेषज्ञता साझा कर सकता है, जबकि भारत की सामाजिक और विकास संबंधी चुनौतियों को बड़े पैमाने पर व्यावसायिक अवसरों में बदलने की क्षमता से सीख सकता है। जाइका ने भारतीय बाजार के अवसरों को अधिक संख्या में जापानी स्टार्टअप्स तक पहुंचाने की भी इच्छा जताई।

बैठक में जापान की लगभग 40 प्रमुख कंपनियों और निवेश संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें स्पार्क्स ग्रुप, एमयूएफजी इनोवेशन पार्टनर्स, बियॉन्ड नेक्स्ट वेंचर्स, मिजुहो फाइनेंशियल ग्रुप, एसबीआई इन्वेस्टमेंट, फुजित्सु, डीजी दाइवा वेंचर्स और अन्य प्रमुख संस्थाएं शामिल थीं।

उद्योग प्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया कि एमएसएमई क्षेत्र को स्टार्टअप्स और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के साथ अधिक मजबूती से जोड़ा जाना चाहिए। साथ ही भारत में उत्पादन स्थापित करने वाली कंपनियों के लिए बेहतर प्लग-एंड-प्ले अवसंरचना उपलब्ध कराने की आवश्यकता भी बताई गई।

निवेशकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य सेवाएं, अंतरिक्ष, रक्षा, उन्नत विनिर्माण और डीप-टेक को भारत-जापान निवेश सहयोग के प्रमुख भविष्यगत क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम अब केवल इंटरनेट और सॉफ्टवेयर आधारित कारोबार से आगे बढ़कर विनिर्माण और उन्नत प्रौद्योगिकी-आधारित उद्यमों की ओर तेजी से अग्रसर है।

बयान में आगे कहा गया है कि बैठक में भारतीय स्टार्टअप्स ने एयरोस्पेस एवं रक्षा, ड्रोन, एआई, स्वास्थ्य सेवाएं, रोबोटिक्स, कृत्रिम अंग, वेयरहाउस स्वचालन, गतिशीलता और डिजिटल स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। कई कंपनियों ने जापानी साझेदारों के साथ तकनीकी सत्यापन, उन्नत विनिर्माण, निवेश, बाजार पहुंच और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में शामिल होने की संभावनाओं पर चर्चा की।

--आईएएनएस

डीबीपी

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