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भारत-नॉर्डिक समिट में शामिल होंगे पीएम मोदी, नॉर्वे की राजदूत बोलीं- '43 सालों में पहली बार भारतीय प्रधानमंत्री का दौरा'


नई दिल्ली, 11 मई (आईएएनएस)। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर नॉर्वे पहुंचेंगे। वह भारत-नार्डिक शिखर सम्मेलन में शामिल होने वाले हैं। नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने बताया कि 43 सालों में पहली बार भारत के कोई प्रधानमंत्री यहां पहुंचने वाले हैं। भारत के साथ होने वाला नॉर्डिक समिट ऐतिहासिक है। उन्होंने आईएएनएस के साथ खास बातचीत के दौरान नॉर्वे और भारत के बीच क्लाइमेट चेंज, ग्रीन एनर्जी, समुद्री व्यापार और स्टार्टअप इकोसिस्टम में सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया।

नई दिल्ली, 11 मई (आईएएनएस)। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर नॉर्वे पहुंचेंगे। वह भारत-नार्डिक शिखर सम्मेलन में शामिल होने वाले हैं। नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने बताया कि 43 सालों में पहली बार भारत के कोई प्रधानमंत्री यहां पहुंचने वाले हैं। भारत के साथ होने वाला नॉर्डिक समिट ऐतिहासिक है। उन्होंने आईएएनएस के साथ खास बातचीत के दौरान नॉर्वे और भारत के बीच क्लाइमेट चेंज, ग्रीन एनर्जी, समुद्री व्यापार और स्टार्टअप इकोसिस्टम में सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया।

आईएएनएस :- नॉर्वे और भारत के लिए नॉर्डिक समिट का क्या महत्व है?

जवाब :- नॉर्वे के लिए इसका महत्व यह है कि यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण दौरा है। हम इसे लगभग एक ऐतिहासिक दौरा कहेंगे। 12 साल प्रधानमंत्री रहने के बाद यह पहली बार है जब प्रधानमंत्री मोदी नॉर्वे जा रहे हैं। और यह 43 सालों में पहली बार है जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री नॉर्वे का दौरा करेगा। इसलिए, हम इस दौरे का बहुत इंतजार कर रहे हैं। हम अगले हफ्ते ओस्लो में प्रधानमंत्री मोदी का उत्साह के साथ स्वागत करने के लिए बहुत उत्सुक हैं।

आईएएनएस :- ईआर समिट में नॉर्वे की मुख्य प्राथमिकताएं क्या हैं?

जवाब :- नॉर्वे की मुख्य प्राथमिकताएं भारत के साथ क्लाइमेट चेंज, एनर्जी ट्रांजिशन और भविष्य के लिए ग्रीन सॉल्यूशन पर चर्चा करना है। भारत की आबादी बहुत ज्यादा है, अभी दुनिया में सबसे ज्यादा और यहां तेजी से आर्थिक विकास हो रहा है। हम इस विकास को ग्रीन बनाने के भारत के मकसद में उसका साथ देना चाहते हैं।

आईएएनएस :- आप नॉर्वे और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार को कैसे देखती हैं?

जवाब :- नॉर्वे और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार अभी बहुत बड़ा नहीं है। लेकिन, पिछले 10 सालों में, भारत में नॉर्वे की कंपनियों की संख्या दोगुनी हो गई है। तो, अब भारत में लगभग 160 नॉर्वे की कंपनियां काम कर रही हैं। और वे नए सॉल्यूशन देख रही हैं। वे इन सेक्टर्स में व्यापार और निवेश के नए मौके देख रही हैं, जिनका मैंने पहले ही जिक्र किया है। खासकर एनर्जी, मैरीटाइम और सर्कुलर अर्थव्यवस्था।

आईएएनएस :- आप हमारे पश्चिम एशिया संकट को कैसे देखती हैं?

जवाब :- हम नॉर्वे और भारत के बीच पश्चिम एशिया संकट पर भी चर्चा करेंगे। हम नॉर्डिक देशों और इंडिया के बीच नॉर्डिक-इंडिया समिट में भी इस पर चर्चा करेंगे। जैसा मैंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है। यह एक बहु जरूरी स्टेकहोल्डर है। इसलिए, हमारे लिए सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ एक आम भू-राजनीतिक स्थिति पर चर्चा करना बहुत जरूरी है। ओस्लो में मिलने वाले सभी छह देश, नियमों पर आधारित वर्ल्ड ऑर्डर का सपोर्ट करते हैं। तो, यह बहुत जरूरी है। फिर, पश्चिम एशिया संकट पर आते हैं, बेशक, इस पर भी चर्चा होगी। हम, नॉर्वे के तौर पर, बहुत खुश हैं कि एक सीजफायर समझौता है। हमें उम्मीद है कि इसे और मजबूत किया जाएगा। हमें उम्मीद है कि एक शांति समझौता भी होगा। हम उम्मीद करते हैं कि यह झगड़ा जल्द ही खत्म हो जाएगा।

आईएएनएस :- भारत और नॉर्वे के बीच सहयोग के लिए किस सेक्टर में सबसे ज्यादा संभावना है?

जवाब :- अभी तक, भारत में नॉर्वे की लगभग 70 फीसदी कंपनियां समुद्री क्षेत्र में हैं। नॉर्वे एक बड़ा समुद्री देश है, जैसा कि भारत भी है। उस सेक्टर में बहुत सारे मौके हैं। मुझे पता है कि भारत सरकार भारत में ज्यादा जहाज बनाने के लिए बहुत इच्छुक है। नॉर्वे के 10 फीसदी चालू जहाज अब भारत में बन रहे हैं। इसलिए, अगर मैं किसी एक क्षेत्र की बात करूं, तो वह समुद्री सेक्टर होगा।

आईएएनएस :- नॉर्वे भारत को कैसे सपोर्ट कर रहा है?

जवाब :- ग्रीन एनर्जी सेक्टर में, हम भारत को भी सपोर्ट कर रहे हैं। हम भारत को और भी ज्यादा समर्थन करना चाहते हैं। नॉर्वे एक एनर्जी सुपरपावर है। हमारे पास 70 के दशक की शुरुआत से ही तेल और गैस है। और अब हम खुद ग्रीन फ्यूचर की ओर बढ़ रहे हैं। इस बदलाव के लिए हमारे पास बहुत सारे अच्छे तकनीकी समाधान हैं, जिसे नॉर्वे की कंपनियां सच में इंडियन स्टेकहोल्डर्स को भी देना चाहती हैं और इस सफर में भारत को सपोर्ट करना चाहती हैं।

आईएएनएस :- इंडो-नॉर्डिक पार्टनरशिप को मजबूत करने में स्टार्ट-अप्स क्या भूमिका निभा सकते हैं?

जवाब :- नॉर्वे से देखें तो, हम इंडिया में स्टार्ट-अप इकोसिस्टम से बहुत प्रभावित हैं। बहुत कुछ हो रहा है। बहुत सारे नवाचार हो रहे हैं। नॉर्वे के स्टार्ट-अप्स भी इस पर ध्यान दे रहे हैं। हम यह भी देख रहे हैं कि हम बेहतर रिसर्च के साथ इसे कैसे सपोर्ट कर सकते हैं। ओस्लो में इस विजिट के दौरान कुछ डील्स पक्की करने की भी कोशिश कर रहे हैं।

--आईएएनएस

केके/एबीएम

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