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भारतीय आमों की मिठास से मजबूत होंगे रिश्ते, नितिन नवीन ने 82 देशों के राजनयिकों को भेजे विशेष बॉक्स


नई दिल्ली, 24 जून (आईएएनएस)। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भारत के आम को मेहमाननवाजी, दोस्ती और समृद्ध कृषि परंपरा का प्रतीक बताते हुए 82 देशों के राजनयिकों को भारतीय आमों के विशेष उपहार बॉक्स भेंट क‍िए। यह भारत की कृषि विरासत और सांस्कृतिक पहचान को दुनिया तक पहुंचाने और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने की एक अनोखी पहल है।

नई दिल्ली, 24 जून (आईएएनएस)। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भारत के आम को मेहमाननवाजी, दोस्ती और समृद्ध कृषि परंपरा का प्रतीक बताते हुए 82 देशों के राजनयिकों को भारतीय आमों के विशेष उपहार बॉक्स भेंट क‍िए। यह भारत की कृषि विरासत और सांस्कृतिक पहचान को दुनिया तक पहुंचाने और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने की एक अनोखी पहल है।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने नई दिल्ली में तैनात 82 देशों के राजनयिकों को खास तौर पर तैयार किए गए प्रीमियम भारतीय आमों के उपहार बॉक्स भेजे हैं।

इन बॉक्स में भारत की चार सबसे प्रसिद्ध आमों की किस्में (केसर, दशहरी, बंगनपल्ली और लंगड़ा) शामिल थीं। ये सभी किस्में अपने अलग स्वाद, खुशबू और क्षेत्रीय पहचान के लिए जानी जाती हैं। इस पहल के जरिए भारत की विविध बागवानी परंपराओं और दुनिया भर में पसंद किए जाने वाले उसके सबसे लोकप्रिय फल को सामने लाने की कोशिश की गई है।

आमों के साथ नितिन नवीन ने राजनयिकों को एक व्यक्तिगत संदेश भी भेजा। उन्होंने अपने संदेश में शुभकामनाएं देते हुए भारतीय संस्कृति में आम के महत्व को बताया। उन्होंने आम को मेहमाननवाजी, दोस्ती और भारत की समृद्ध कृषि परंपरा का प्रतीक बताया।

इस पहल को सांस्कृतिक कूटनीति (कल्चरल डिप्लोमेसी) के रूप में देखा जा रहा है, जहां भारत के सबसे पहचान वाले फलों में से एक आम के जरिए सद्भावना बढ़ाने और राजधानी में मौजूद अंतरराष्ट्रीय राजनयिक समुदाय के साथ रिश्तों को और मजबूत करने की कोशिश की गई है।

भारत दुनिया में आम के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है। केसर, दशहरी, बंगनपल्ली और लंगड़ा जैसी किस्में अपने बेहतरीन स्वाद और गुणवत्ता के कारण न सिर्फ भारत में बल्कि विदेशों में भी काफी पसंद की जाती हैं।

गिर केसर: गुजरात के गिरनार पर्वत की तलहटी में उगाया जाने वाला यह मध्यम आकार का आम अपने चमकीले केसरिया गूदे और बेहद मीठे और सुगंधित रस के लिए मशहूर है। साल 2011 में मिले जीआई टैग (ज्योग्राफिकल इंडिकेशन) ने इसके खास क्षेत्रीय स्वाद को पहचान और संरक्षण दिया है। असली केसर आम को उसके हल्के लाल रंग और बेहतरीन मिठास से पहचाना जाता है।

मलिहाबादी दशहरी: उत्तर प्रदेश के मलिहाबाद का आम बेहद पतले छिलके, बिना रेशों वाले गूदे और शहद जैसी मिठास के लिए जाना जाता है। वर्ष 2009 में मिले जीआई टैग ने इसकी ऐतिहासिक खेती और इसकी खास खुशबू को संरक्षण दिया है।

बनगानपल्ली: आंध्र प्रदेश की यह प्रसिद्ध किस्म आकार में बड़ी और हल्के अंडाकार रूप वाली होती है। इसका सुनहरा पीला छिलका लगभग बिना दाग-धब्बों का होता है और इसका गूदा मोटा, मजबूत तथा बिना रेशों वाला होता है, जो काटने पर अपना आकार बनाए रखता है। साल 2017 में मिले जीआई टैग ने इसे दक्षिण भारत की एक प्रीमियम आम किस्म के रूप में मान्यता दी है और इसकी खास बनावट, बड़े आकार तथा लंबे समय तक ताजा रहने की क्षमता को सुरक्षित किया है।

बनारसी लंगड़ा: उत्तर प्रदेश के वाराणसी से जुड़ी यह अनोखी आम की किस्म पकने के बाद भी बाहर से हरी ही दिखाई देती है। इसके अंदर का गूदा नींबू-पीले रंग का, बेहद रसदार और स्वाद में मीठा-खट्टा होता है। इसकी तेज और लंबे समय तक रहने वाली खुशबू इसे खास बनाती है। वर्ष 2023 में मिले जीआई टैग ने इसके अनोखे स्वाद और पहचान को बनारस क्षेत्र से आधिकारिक रूप से जोड़ दिया है।

--आईएएनएस

एवाई/डीकेपी

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