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भारतीय खेल जगत के लिए बेहद खास है '4 मार्च', इसी दिन जन्मे दो स्टार खिलाड़ी

नई दिल्ली, 3 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय खेल जगत के लिए '4 मार्च' का दिन बेहद खास रहा है। इसी दिन भारत के 2 मशहूर खिलाड़ियों का जन्म हुआ।

नई दिल्ली, 3 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय खेल जगत के लिए '4 मार्च' का दिन बेहद खास रहा है। इसी दिन भारत के 2 मशहूर खिलाड़ियों का जन्म हुआ।

4 मार्च 1980 को बेंगलुरु में जन्मे रोहन बोपन्ना ने 45 की उम्र में प्रोफेशनल टेनिस से संन्यास लिया। इस बीच उन्होंने 3 ओलंपिक गेम्स (2012, 2016 और 2024) में देश का प्रतिनिधित्व किया।

रोहन बोपन्ना ने महज 19 साल की उम्र में टेनिस सफर की शुरुआत की थी। साल 2007 में हॉपमैन कप में उन्होंने सानिया मिर्जा के साथ मिक्स्ड डबल्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए सुर्खियां बटोरीं। यह जोड़ी टूर्नामेंट में उपविजेता रही थी।

उसी साल बोपन्ना ने पाकिस्तान के ऐसाम-उल-हक कुरैशी के साथ जोड़ी बनाई, जिसे 'इंडो-पाक एक्सप्रेस' नाम से जाना गया। साल 2010 में उन्होंने विंबलडन के क्वार्टर फाइनल और यूएस ओपन के मेंस डबल्स फाइनल तक का सफर तय किया।

साल 2012 में उन्होंने हमवतन महेश भूपति के साथ जोड़ी बनाई और ओलंपिक के दूसरे दौर तक का सफर तय किया। इसके बाद पेरिस मास्टर्स का खिताब अपने नाम किया।

साल 2016 में बोपन्ना, सानिया मिर्जा के साथ मिक्स्ड डबल्स में ओलंपिक पदक जीतने के बेहद करीब पहुंचे, लेकिन मेडल नहीं जीत सके। साल 2017 में बोपन्ना ने कनाडा की गैब्रिएला डाब्रोव्स्की के साथ अपना पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीता। वह ऐसा करने वाले चौथे भारतीय बने।

साल 2018 में बोपन्ना ने दिविज शरण के साथ एशियन गेम्स 2018 में मेंस डबल्स का गोल्ड जीता। ऑस्ट्रेलियन ओपन 2023 में सानिया मिर्जा के साथ मिक्स्ड डबल्स फाइनल तक जगह बनाई। 43 की उम्र में रोहन बोपन्ना एटीपी मास्टर्स 1000 खिताब जीतने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बने। इसके बाद उन्होंने मियामी ओपन 2024 का खिताब जीता। ऑस्ट्रेलिन ओपन 2024 में बोपन्ना मेंस डबल्स ट्रॉफी जीतकर ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बने। इसके साथ ही उनके नाम डबल्स टेनिस रैंकिंग में सबसे उम्रदराज वर्ल्ड नंबर-1 खिलाड़ी बनने का रिकॉर्ड भी है।

साल 2003 में '4 मार्च' के ही दिन मशहूर शटलर पुलेला गोपीचंद और पूर्व ओलंपियन पीवीवी लक्ष्मी के घर पर गायत्री का जन्म हुआ था। गायत्री गोपीचंद ऐसे घर में पली-बढ़ी, जहां बैडमिंटन जीवन का प्रमुख हिस्सा था। बचपन से ही गायत्री के साथ उनके भाई साई विष्णु भी बैडमिंटन की ट्रेनिंग करने लगे।

जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप 2017 में गायत्री राउंड ऑफ 16 तक पहुंचीं। इसी साल पेम्बंगुनन जया राया इंटरनेशनल जूनियर ग्रां प्री के फाइनल में भी जगह बनाई। महज 15 साल की उम्र में गायत्री अंडर-17 वर्ग में भारत की नंबर-1 बैडमिंटन खिलाड़ी थीं। इसी के आधार पर उन्हें महज 15 वर्ष की उम्र में एशियन गेम्स 2018 में भारतीय बैडमिंटन टीम में स्थान मिला। उस समय गायत्री एशियन गेम्स में भारतीय बैडमिंटन टीम में शामिल होने वाली सबसे युवा शटलर थीं।

एशियन गेम्स में शानदार अनुभव के साथ गायत्री ने साल 2019 में सीनियर सर्किट में जगह बनाई और अगले ही साल साउथ एशियन गेम्स में अपना पहला सीनियर मेडल जीता। वह काठमांडू मीटर में गोल्ड जीतने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा रहीं। पोलिश इंटरनेशनल 2021 में गायत्री उप-विजेता रहीं। कॉमनवेल्थ गेम्स 2023 में गायत्री ने मिक्स्ड टीम इवेंट में सिल्वर, जबकि विमेंस डबल्स में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। एशियन टीम चैंपियनशिप में गायत्री ने गोल्ड अपने नाम किया था।

--आईएएनएस

आरएसजी

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