
भोपाल, मध्य प्रदेश। राजधानी भोपाल की जीवन रेखा कहे जाने वाले 'बड़ा तालाब' को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान वर्तमान में सुस्त पड़ता दिखाई दे रहा है। एनजीटी की सख्ती के बाद जिला प्रशासन और नगर निगम ने तालाब के फुल टैंक लेवल (FTL) और 50 मीटर के दायरे में करीब 400 अवैध कब्जों को चिह्नित किया था, लेकिन पिछले डेढ़ महीने में केवल 40 निर्माणों पर ही बुलडोजर चल सका है। शेष मामलों को सुनवाई के नाम पर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
बड़ा तालाब के संरक्षण को लेकर जिला प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती रसूखदारों के अवैध निर्माण हैं। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, तालाब के प्रतिबंधित दायरे में कई नामी होटलों और निजी संपत्तियों का हिस्सा आ रहा है। इसमें वन विहार रोड स्थित होटल रंजीत, होटल टोरकस, अन्नतास गार्डन और लेक हाउस जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इसके अलावा होटल जहांनुमा, सायाजी और विंड एंड वेव्स जैसी संपत्तियों के निर्माण भी जद में बताए जा रहे हैं। रसूखदारों के इन निर्माणों पर कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन अब 'पूरे मामले को समझने' और 'सुनवाई' का तर्क दे रहा है, जिससे अभियान की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
तालाब किनारे अतिक्रमण हटाने के लिए जो विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई थी, वह पूरी तरह लड़खड़ा गई है। 6 अप्रैल से शुरू हुई कार्रवाई के तहत भदभदा और हलालपुरा क्षेत्र में कुछ शेड और दुकानों को हटाया गया था, लेकिन उसके बाद से बुलडोजर शांत है। 15 से 17 अप्रैल के बीच संत हिरदाराम नगर और हुजूर तहसील क्षेत्र में प्रस्तावित बड़ी कार्रवाइयां प्रशासनिक सुस्ती के कारण अंजाम नहीं दी जा सकीं। वर्तमान कलेक्टर प्रियंक मिश्रा का कहना है कि वे पहले पूरे प्रकरण का बारीकी से अध्ययन करेंगे और उसके बाद ही आगे की भूमिका तय की जाएगी।
बड़ा तालाब को बचाने के लिए पिछले 8 वर्षों में तीन बड़े सर्वे किए जा चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति ढाक के तीन पात वाली ही है। साल 2016 में हुए डीजीपीएस सर्वे से लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुए सर्वे तक, रिपोर्टों का अंबार लगा है। एनजीटी के सर्वे में तो तालाब की सीमा दर्शाने वाली 141 मुनारें (सीमा पत्थर) ही गायब मिली थीं। विडंबना यह है कि प्रशासन के पास अतिक्रमणों का पूरा डेटा होने के बावजूद अवैध निर्माणों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और 'सुनवाई' के नाम पर भू-माफियाओं को समय दिया जा रहा है।
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