नई दिल्ली, 3 मार्च (आईएएनएस)। आज की आधुनिक और भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता या स्ट्रेस हर उम्र के लोगों के लिए एक आम समस्या बन गई है। इसके पीछे की वजह हर इंसान के लिए अलग-अलग हो सकता है, लेकिन नकारात्मक प्रभाव लगभग समान है।
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नई दिल्ली, 3 मार्च (आईएएनएस)। आज की आधुनिक और भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता या स्ट्रेस हर उम्र के लोगों के लिए एक आम समस्या बन गई है। इसके पीछे की वजह हर इंसान के लिए अलग-अलग हो सकता है, लेकिन नकारात्मक प्रभाव लगभग समान है।
तनाव लेने से व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। लोगों की इसी स्थिति को देखते हुए भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने दैनिक जीवन में योग और प्राणायाम को डेली बेसिस पर शामिल करने की सलाह दी है।
योग और प्राणायाम व्यक्ति के स्वास्थ्य, मानसिक शांति, और शारीरिक क्षमता को बढ़ाने के लिए एक काफी लाभकारी उपाय हैं। उन्हीं में से एक भ्रामरी प्राणायाम को प्रतिदिन कुछ समय करने से आपको तनाव और चिंता से राहत मिलती है, जिससे दिमाग को गहरी शांति और सुकून का अनुभव होता है।
आयुष मंत्रालय का कहना है कि भ्रामरी प्राणायाम न केवल तनाव और चिंता को कम करता है, बल्कि आपके मस्तिष्क को गहरे विश्राम की स्थिति में ले जाता है। इसकी गूंजती हुई ध्वनि आपके तंत्रिका तंत्र के लिए किसी मधुर संगीत से कम नहीं है। इसलिए इसे आज ही अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं।
भ्रामरी प्राणायाम एक प्रभावी श्वास तकनीक है, जिसमें सांस छोड़ते समय भौंरे की तरह गूंज (भिनभिनाने) वाली ध्वनि उत्पन्न की जाती है। भ्रामरी प्राणायाम को प्रतिदिन नियमित रूप से करने से शरीर को कई लाभ मिलते हैं। यह तनाव से मुक्त करता है और चिंता, क्रोध एवं अतिसक्रियता को घटाता है।
आयुष मंत्रालय ने बताया भ्रामरी प्राणायाम करते समय भौरे जैसी आवाज का प्रतिध्वनिक प्रभाव मस्तिष्क एवं तंत्रिका तंत्र के लिए लाभकारी होता है। यह एकाग्रता और ध्यान करने के लिए एक उपयोगी प्रारंभिक प्राणायाम है।
भ्रामरी प्राणायाम करने के लिए सुबह उठकर एक शांत वातावरण में सुखासन मुद्रा में सीधे बैठें। इसके बाद अपनी आंखें बंद करें और कानों को अंगूठों से बंद कर लें। फिर गहरी सांस लें और सांस छोड़ते हुए मुंह बंद रखकर गुंजन की आवाज करें। शांत वातावरण में सुखासन में बैठकर इसका अभ्यास 5 से 7 बार करना काफी फायदेमंद होता है।
--आईएएनएस
डीके/वीसी
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