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'भूल भुलैया' के जॉनर पर प्रियदर्शन ने तोड़ी चुप्पी, बताया क्यों है यह साइकोलॉजिकल थ्रिलर


मुंबई, 21 जुलाई (आईएएनएस)। दिग्गज निर्देशक प्रियदर्शन ने कॉमेडी, ड्रामा और थ्रिलर जैसी कई तरह की फिल्मों का निर्देशन किया और दर्शकों को कई यादगार फिल्में दी। खासतौर पर उनकी फिल्म 'भूल भुलैया' आज भी हिंदी सिनेमा की लोकप्रिय फिल्मों में गिनी जाती है। इस फिल्म को अक्सर हॉरर कॉमेडी की कैटेगरी में रखा जाता है, लेकिन प्रियदर्शन इसे हॉरर कॉमेडी नहीं मानते। उन्होंने कहा कि फिल्म का असली आधार डर नहीं, बल्कि इंसानी दिमाग और मनोविज्ञान था। इसलिए यह फिल्म एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर है।

मुंबई, 21 जुलाई (आईएएनएस)। दिग्गज निर्देशक प्रियदर्शन ने कॉमेडी, ड्रामा और थ्रिलर जैसी कई तरह की फिल्मों का निर्देशन किया और दर्शकों को कई यादगार फिल्में दी। खासतौर पर उनकी फिल्म 'भूल भुलैया' आज भी हिंदी सिनेमा की लोकप्रिय फिल्मों में गिनी जाती है। इस फिल्म को अक्सर हॉरर कॉमेडी की कैटेगरी में रखा जाता है, लेकिन प्रियदर्शन इसे हॉरर कॉमेडी नहीं मानते। उन्होंने कहा कि फिल्म का असली आधार डर नहीं, बल्कि इंसानी दिमाग और मनोविज्ञान था। इसलिए यह फिल्म एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर है।

आईएएनएस से बात करते हुए प्रियदर्शन ने कहा, ''हमने हॉरर कॉमेडी जॉनर फिल्मों की शुरुआत करते हुए 'भूल भुलैया' फिल्म बनाई थी। उसके बाद दूसरे लोगों ने इसे आगे बढ़ाया, लेकिन मैं 'भूल भुलैया' को हॉरर फिल्म नहीं मानता। फिल्म को डरावनी कहानी के तौर पर नहीं बनाया गया था, बल्कि यह एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर है, जिसमें रहस्य, भावनाएं और हास्य का संतुलन देखने को मिला है।''

फिल्म के जॉनर को समझाते हुए प्रियदर्शन ने बताया, ''किसी तनावपूर्ण कहानी के बीच थोड़ा सा हास्य भी दर्शकों पर गहरा असर डाल सकता है। जब दर्शक थिएटर में किसी गंभीर या डर पैदा करने वाली कहानी को देखते हैं, तो उस बीच आने वाला छोटा सा मजेदार पल भी काफी प्रभावी हो जाता है।''

प्रियदर्शन ने बताया कि पूरी तरह से कॉमेडी फिल्म बनाना सबसे मुश्किल कामों में से एक है। दर्शकों को लगातार हंसाते रहना आसान नहीं होता, क्योंकि एक ही मजाक या सीन को बार-बार देखने के बाद उसका असर कम हो सकता है।

उन्होंने कहा, ''कॉमेडी फिल्म बनाना बहुत मुश्किल होता है। मैंने कॉमेडी फिल्में बनाते हुए काफी संघर्ष किया है। कई बार जब मैं अपनी ही फिल्मों को दोबारा देखता हूं, जो बड़ी हिट रही हैं, तो मुझे खुद हंसी नहीं आती। तब लगता है कि शायद वह असर खत्म हो गया है, लेकिन जब वही फिल्म थिएटर में चलती है और दर्शकों की प्रतिक्रिया देखता हूं तो समझ आता है कि उसका अनुभव अलग होता है।''

उन्होंने कहा, ''हॉरर और कॉमेडी दोनों को एक साथ सही तरीके से पेश करना बेहद चुनौतीपूर्ण काम है। जब भी मैं डर और हास्य को मिलाने की कोशिश करता हूं तो मुझे खुद भी एक अलग तरह का रोमांच महसूस होता है। मैं कह सकता हूं कि यह बहुत मुश्किल काम है।''

--आईएएनएस

पीके/वीसी

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