Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

बिदादी टाउनशिप परियोजना पर कर्नाटक सरकार ने बनाई समिति, 30 दिन में मांगी रिपोर्ट


बेंगलुरु, 9 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक सरकार की ओर से बिदादी टाउनशिप या ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड सबअर्बन प्रोजेक्ट को लेकर उठ रही अलग-अलग राय और चिंताओं की व्यापक जांच के लिए जस्टिस गुहानाथन नरेंद्र की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। इस समिति को 30 दिनों के अंदर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

बेंगलुरु, 9 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक सरकार की ओर से बिदादी टाउनशिप या ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड सबअर्बन प्रोजेक्ट को लेकर उठ रही अलग-अलग राय और चिंताओं की व्यापक जांच के लिए जस्टिस गुहानाथन नरेंद्र की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। इस समिति को 30 दिनों के अंदर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

समिति में रिटायर्ड मुख्य सचिव एस.वी. रंगनाथ, रिटायर्ड अतिरिक्त मुख्य सचिव एस.आर. उमाशंकर और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी प्रसन्ना कुमार सदस्य के तौर पर शामिल हैं। पैनल को 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। समिति कानूनी, मानवीय और व्यापक विकास के नजरिए से परियोजना की जांच करेगी और सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपेगी।

बिदादी के पास एक इंटीग्रेटेड टाउनशिप विकसित करने का विचार पहली बार 2006 में पेश किया गया था। मौजूदा सरकार का कहना है कि इससे बेंगलुरु के आसपास निवेश के अवसरों को बढ़ाने में मदद मिलेगी। हाल के वर्षों में सरकार ने लंबे समय से लंबित बिदादी इंटीग्रेटेड टाउनशिप परियोजना को ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड सबअर्बन प्रोजेक्ट के रूप में फिर से शुरू करने का फैसला किया है।

सरकार ने कहा है कि इस परियोजना का उद्देश्य मौजूदा रिहायशी इलाकों के विस्थापन को कम करना और साथ ही जमीन मालिकों को बेहतर मूल्य सुनिश्चित करना होगा। सरकार की ओर से यह भी दोहराया गया है कि परियोजना को और अधिक जन-अनुकूल बनाने के लिए जनता के सुझावों, सिफारिशों और विचारों को ध्यान में रखा जाएगा।

अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य निवासियों की आकांक्षाओं का सम्मान करना, सभी हितधारकों का भरोसा जीतना और परियोजना में और सुधार करना है। समिति का गठन इन्हीं प्रयासों का हिस्सा है।

हाल ही में कर्नाटक हाईकोर्ट ने बिदादी टाउनशिप परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण को चुनौती देने वाली पीआईएल खारिज कर दी थी जिससे सरकार और मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को बड़ी राहत मिली थी।

सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा था कि अधिग्रहण की प्रक्रिया अलग हो सकती है और बेहतर मुआवजा देने के लिए किसी खास कानून का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। बेंच ने गौर किया था कि राज्य का दावा था कि मुआवजा 2013 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के प्रावधानों के तहत दिया जा रहा था और याचिकाकर्ता से कानून के किसी खास उल्लंघन के बारे में बताने को कहा।

--आईएएनएस

एसडी/वीसी

Share:

Leave A Reviews

Related News