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बीएस-VI वाहनों के लिए पीयूसी नियमों में बदलाव की तैयारी, सर्टिफिकेट वैलिडिटी तीन साल तक बढ़ाने का प्रस्ताव


नई दिल्ली, 24 जून (आईएएनएस)। केंद्र सरकार भारत स्टेज VI (बीएस-VI) वाहनों के लिए 'पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट' (पीयूसीसी) के रिन्यूअल नियमों में बड़ी ढील देने पर विचार कर रही है। इस कदम का मकसद नए और कम प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के मालिकों पर नियमों का पालन करने का बोझ कम करना है।

नई दिल्ली, 24 जून (आईएएनएस)। केंद्र सरकार भारत स्टेज VI (बीएस-VI) वाहनों के लिए 'पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट' (पीयूसीसी) के रिन्यूअल नियमों में बड़ी ढील देने पर विचार कर रही है। इस कदम का मकसद नए और कम प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के मालिकों पर नियमों का पालन करने का बोझ कम करना है।

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रस्ताव में नई बीएस-VI प्राइवेट गाड़ियों के लिए पीयूसीसी की वैलिडिटी को मौजूदा एक साल से बढ़ाकर तीन साल करने की बात कही गई है। अगर इसे मंजूरी मिल जाती है तो बीएस-VI प्राइवेट कारों के मालिकों को हर साल पॉल्यूशन सर्टिफिकेट रिन्यू कराने के बजाय, गाड़ी की शुरुआती छह साल की उम्र में सिर्फ दो बार रिन्यू कराना होगा।

प्रस्तावित नियम के तहत छह साल तक पुरानी बीएस-VI प्राइवेट गाड़ियों के लिए पीयूसीसी की वैलिडिटी तीन साल होगी। छह से 10 साल पुरानी गाड़ियों के लिए हर साल रिन्यूअल की जरूरत होगी, जबकि 10 साल से ज्यादा पुरानी कारों के लिए हर छह महीने में सर्टिफिकेट रिन्यू कराना होगा।

सरकार कमर्शियल बीएस-VI गाड़ियों के लिए भी अलग नियमों पर विचार कर रही है। छह साल तक पुरानी कमर्शियल गाड़ियों के लिए पीयूसीसी की वैलिडिटी को दो साल तक बढ़ाया जा सकता है। छह साल से ज्यादा उम्र होने पर प्राइवेट गाड़ियों वाला रिन्यूअल शेड्यूल ही लागू होगा।

यह प्रस्ताव पुराने मॉडलों की तुलना में बीएस-VI गाड़ियों से होने वाले काफी कम एमिशन (उत्सर्जन) पर आधारित है। बीएस-VI मानकों वाली गाड़ियां बीएस-IV गाड़ियों की तुलना में 82 प्रतिशत तक कम पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) और लगभग 25 प्रतिशत कम नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओएक्स) उत्सर्जित करती हैं, जिससे वे काफी साफ-सुथरी और कम प्रदूषण फैलाने वाली होती हैं।

अधिकारियों ने कहा कि प्रस्तावित बदलावों का मकसद हवा की गुणवत्ता खराब करने में गाड़ियों से होने वाले एमिशन की भूमिका को समझते हुए पुरानी और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों के लगातार इस्तेमाल को हतोत्साहित करना भी है। सरकार साथ ही पीयूसीसी टेस्टिंग प्रोसेस को मजबूत करने पर भी काम कर रही है ताकि ज्यादा सटीकता सुनिश्चित की जा सके और एमिशन रीडिंग में हेरफेर को रोका जा सके।

इस प्रस्ताव को विशेषज्ञों का समर्थन मिला है, जिनमें सड़क परिवहन मंत्रालय के एक पूर्व संयुक्त सचिव भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि नई बीएस-VI गाड़ियों से कम एमिशन होने के कारण सर्टिफिकेट की लंबी वैलिडिटी अवधि उचित है।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। पूर्व डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर अनिल छिकारा ने कहा कि सरकार को गाड़ी के मेंटेनेंस स्टैंडर्ड्स पर भी विचार करना चाहिए, क्योंकि ठीक से मेंटेन न किए जाने पर नई कारें भी ज्यादा एमिशन कर सकती हैं।

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी

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