
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को एक महत्वपूर्ण कानूनी मामले में बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ ने राहुल गांधी के खिलाफ 'इंडियन स्टेट' से लड़ाई वाले विवादित बयान को लेकर दाखिल याचिका को शुक्रवार को खारिज कर दिया। उच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद अब इस मामले में राहुल गांधी के खिलाफ न तो कोई मुकदमा दर्ज होगा और न ही आगे की कानूनी कार्यवाही चलेगी।
यह मामला पिछले वर्ष कांग्रेस के नए मुख्यालय 'इंदिरा भवन' के उद्घाटन समारोह से जुड़ा है। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा था, "भाजपा और आरएसएस ने देश की हर संस्था पर कब्जा कर लिया है। अब हमारी लड़ाई सिर्फ भाजपा या आरएसएस जैसे किसी राजनीतिक संगठन से नहीं, बल्कि खुद 'इंडियन स्टेट' (भारतीय राज्य व्यवस्था) से है।" उन्होंने आरएसएस की विचारधारा को हजारों साल पुरानी बताते हुए कहा था कि यह लड़ाई निष्पक्ष नहीं है क्योंकि संस्थाओं पर कब्जा हो चुका है।
याचिकाकर्ता सिमरन गुप्ता ने राहुल गांधी के इस बयान को 'देशद्रोह' की श्रेणी में रखते हुए उन पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। इससे पहले, 7 नवंबर 2025 को संभल की चंदौसी कोर्ट (अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश) ने इस याचिका को आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया था। याचिकाकर्ता ने इसी फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में निगरानी याचिका दाखिल की थी, जिसे अब हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा है।
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम डी. चौहान ने सभी पक्षों की दलीलें सुनी थीं और 8 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को ओपन कोर्ट में फैसला सुनाते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता की मांग में कानूनी आधार का अभाव है। कोर्ट के इस रुख से यह संदेश गया है कि राजनीतिक भाषणों में व्यवस्था या तंत्र के विरोध को सीधे तौर पर आपराधिक कृत्य या देशद्रोह नहीं माना जा सकता।
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