
बैतूल. मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में बैंक ऑफ महाराष्ट्र की मोरखा शाखा से जुड़ा कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, कुछ खाताधारकों को बैंक के रिकॉर्ड में मृत दर्शाकर उनके नाम पर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार किए गए। इसके बाद उनकी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) तुड़वाकर और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी में बदलाव कर करीब 1 करोड़ 14 लाख रुपये की कथित हेराफेरी की गई। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने बैंक के एक सहायक प्रबंधक सहित तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, इस मामले में गिरफ्तार आरोपितों में बैंक के सहायक प्रबंधक लुकेश गोखे, नागपुर जिले के मोवाड निवासी, एक टैक्सी चालक गौरव सूर्यवंशी और कियोस्क सेंटर चलाने वाला एक किशोर शामिल है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कथित तौर पर बैंकिंग प्रक्रिया और खाताधारकों की जानकारी का दुरुपयोग कर रकम दूसरे खातों में स्थानांतरित की गई। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस पूरे घटनाक्रम में किसकी क्या भूमिका रही और रकम किन-किन खातों तक पहुंचाई गई।
पुलिस की जांच के मुताबिक, कथित धोखाधड़ी में नेट बैंकिंग से जुड़े पंजीकृत मोबाइल नंबरों में बदलाव किया गया। आरोप है कि सहायक प्रबंधक ने अपनी बैंक आईडी का इस्तेमाल करके कुछ ग्राहकों के खातों में दर्ज मोबाइल नंबर बदले और इसके बाद धनराशि अन्य बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। इस तरीके से खाताधारकों को उनके खातों से होने वाले लेनदेन की जानकारी समय पर मिलने में परेशानी हो सकती थी। हालांकि, मामले से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी।
पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन के अनुसार, छह ग्राहकों की शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। जांच में ज्योति रघुवंशी के खाते से 4 लाख 86 हजार 175 रुपये, फूलवंती के खाते में 2 लाख 74 हजार रुपये और इंद्रेश रघुवंशी के खाते में 1 लाख 85 हजार 786 रुपये की निकासी का विवरण सामने आया। इसके अलावा भोजराज सोनी के खाते से 5 लाख 50 हजार रुपये और रागिनी साहू के खाते से 1 लाख 55 हजार 371 रुपये निकाले जाने की जानकारी भी पुलिस ने दी है।
पुलिस के मुताबिक, कथित तौर पर हड़पी गई रकम का इस्तेमाल कार और अन्य संपत्तियां खरीदने में किया गया। कार्रवाई के दौरान आरोपितों के कब्जे से छह मोबाइल फोन, करीब 8.28 लाख रुपये मूल्य का सोना, लगभग 1.40 लाख रुपये की चांदी और करीब 12 लाख रुपये कीमत की एक कार जब्त की गई है। इसके अतिरिक्त, जांच में सामने आए संबंधित बैंक खातों को फ्रीज कराने की कार्रवाई भी की गई है, ताकि संदिग्ध धनराशि के आगे हस्तांतरण को रोका जा सके।
जांच में पुलिस को यह भी पता चला कि कुछ मामलों में खातों से रकम निकलने की शिकायत सामने आने पर संबंधित राशि का कुछ हिस्सा वापस जमा कराया जाता था। पुलिस को संदेह है कि ऐसा करके ग्राहकों के संदेह को दूर करने और शिकायत को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की गई। इस पहलू की भी जांच की जा रही है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले में लेनदेन के रिकॉर्ड, बैंकिंग विवरण, मोबाइल फोन और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित धोखाधड़ी की रकम किन लोगों और खातों तक पहुंची तथा इस प्रकरण में अन्य कोई व्यक्ति शामिल था या नहीं। बैंक खातों की सुरक्षा और वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता को लेकर सामने आया यह मामला ग्राहकों के लिए भी सतर्क रहने का संदेश देता है। किसी भी संदिग्ध निकासी, मोबाइल नंबर में अनधिकृत बदलाव या बैंकिंग अलर्ट की स्थिति में तुरंत बैंक और संबंधित साइबर अपराध हेल्पलाइन से संपर्क करना महत्वपूर्ण है।
नोट: मामले में गिरफ्तार व्यक्ति फिलहाल आरोपित हैं। उनकी दोषसिद्धि का निर्धारण अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
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