गयाजी, 19 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार के गयाजी में पितृपक्ष मेला-2026 के आयोजन से पहले जिला प्रशासन की ओर से शनिवार को ‘हमर मगध’ सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में मगध के गौरवशाली इतिहास, समृद्ध विरासत, शिक्षा, संस्कार, संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा, कला, साहित्य, संगीत और मगही भाषा सहित विभिन्न विषयों पर विद्वानों एवं विशेषज्ञों ने विस्तार से विचार साझा किए। कार्यक्रम का उद्देश्य पितृपक्ष मेला शुरू होने से पहले गया और मगध की ऐतिहासिक-सांस्कृतिक पहचान को नई पीढ़ी से जोड़ना रहा।
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गयाजी, 19 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार के गयाजी में पितृपक्ष मेला-2026 के आयोजन से पहले जिला प्रशासन की ओर से शनिवार को ‘हमर मगध’ सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में मगध के गौरवशाली इतिहास, समृद्ध विरासत, शिक्षा, संस्कार, संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा, कला, साहित्य, संगीत और मगही भाषा सहित विभिन्न विषयों पर विद्वानों एवं विशेषज्ञों ने विस्तार से विचार साझा किए। कार्यक्रम का उद्देश्य पितृपक्ष मेला शुरू होने से पहले गया और मगध की ऐतिहासिक-सांस्कृतिक पहचान को नई पीढ़ी से जोड़ना रहा।
कार्यक्रम में पहले विषय प्रवेश और उसके बाद विभिन्न सत्रों में वक्ताओं ने मगध की विरासत और वर्तमान संदर्भ में उसकी प्रासंगिकता पर विचार रखे। ‘मगध का इतिहास एवं विरासत’ विषय पर डॉ. मनीष सिन्हा और प्रो. सुधांशु झा ने मगध की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। ‘मगध का शिक्षा, संस्कार एवं संस्कृति’ विषय पर डॉ. राम कृष्ण मिश्र ने मगध की ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों पर अपने विचार रखे। वहीं ‘मगध की आध्यात्मिक पृष्ठभूमि’ विषय पर स्वामी वेंकटेश्वरानाचार्य जी महाराज ने मगध की आध्यात्मिक विरासत एवं उसकी विशिष्ट पहचान पर चर्चा की।
‘मगध की कला, साहित्य एवं संगीत’ विषय पर पं. राजेन्द्र सिजुआर, प्रो. (डॉ.) के. के. नारायण एवं डॉ. राकेश कुमार सिन्हा (रवि) ने क्षेत्र की कला, साहित्य और सांगीतिक परंपराओं के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। ‘मगध की भाषा एवं इसका स्वाद’ विषय पर डॉ. सच्चिदानंद प्रेमी ने मगही भाषा की विशेषताओं, उसकी मिठास और लोकजीवन से उसके गहरे संबंध को रेखांकित किया। सेमिनार में युवाओं की सहभागिता भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। चयनित पांच छात्र-छात्राओं ने निर्धारित विषयों पर अपने विचार रखे और मगध के इतिहास, संस्कृति एवं ज्ञान परंपरा से जुड़े अपने दृष्टिकोण साझा किए।
कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को केवल पुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने मगही भाषा में संबोधित करते हुए कहा कि मगध की धरती पर उसके संस्कार, संस्कृति और मगही भाषा के विकास पर चर्चा करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि मगध का इतिहास स्वर्णिम रहा है। पाटलिपुत्र के वैभव और नालंदा की ज्ञान परंपरा ने दुनिया को प्रभावित किया है। आज भी इस क्षेत्र में बुद्ध और महावीर के शांति एवं अहिंसा के संदेश की गूंज सुनाई देती है।
उन्होंने कहा कि मगही भाषा मगध के लोगों की पहचान और संस्कार से जुड़ी है। इसके विकास के लिए शिक्षा पर जोर देने, युवाओं को आगे बढ़ाने और भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए नए अवसर पैदा करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भाषा के समृद्ध होने से समाज और राष्ट्र भी समृद्ध होता है। उन्होंने मगध के विकास के लिए सभी से मिलकर काम करने का आह्वान किया। सेमिनार के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें संगीत शिक्षक आशुतोष, गया के कलाकारों, जगजीत रौशन, जी.डी. गोयनका स्कूल और गुरुकुल संगीत विद्यालय के कलाकारों ने गायन, बिहार लोक नृत्य और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।
प्रस्तुतियों के माध्यम से मगध और बिहार की लोक एवं सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में पेश किया गया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रतिभागियों एवं सहयोगी कलाकारों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसके बाद बिहार गीत की प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। जिला प्रशासन के अनुसार, ‘हमर मगध’ सेमिनार के माध्यम से पितृपक्ष मेला शुरू होने से पहले गया आने वाले लोगों और स्थानीय युवाओं के बीच मगध की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं भाषाई विरासत को लेकर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।
--आईएएनएस
एमएनपी/डीकेपी
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