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'ब्लैक फ्राइडे' को लेकर विक्रम भट्ट ने किया सेंसर बोर्ड का समर्थन, बोले- 'कोर्ट का फैसला आने तक रिलीज रोकना सही था'


मुंबई, 23 जून (आईएएनएस)। फिल्ममेकर और निर्देशक विक्रम भट्ट ने आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक 'ब्लैक फ्राइडे' पर खुलकर राय रखी। यह निर्देशक अनुराग कश्यप की बेहतरीन फिल्मों में गिनी जाती है। जब यह फिल्म बनी थी, तब इसकी रिलीज को लेकर बड़ा विवाद हुआ था और इसे कई सालों तक सिनेमाघरों में रिलीज नहीं होने दिया गया था। अब विक्रम भट्ट ने इस पूरे मामले पर अपने विचार साझा किए हैं।

मुंबई, 23 जून (आईएएनएस)। फिल्ममेकर और निर्देशक विक्रम भट्ट ने आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक 'ब्लैक फ्राइडे' पर खुलकर राय रखी। यह निर्देशक अनुराग कश्यप की बेहतरीन फिल्मों में गिनी जाती है। जब यह फिल्म बनी थी, तब इसकी रिलीज को लेकर बड़ा विवाद हुआ था और इसे कई सालों तक सिनेमाघरों में रिलीज नहीं होने दिया गया था। अब विक्रम भट्ट ने इस पूरे मामले पर अपने विचार साझा किए हैं।

आईएएनएस से बातचीत में विक्रम भट्ट ने कहा, ''मुझे 'ब्लैक फ्राइडे' काफी अच्छी फिल्म लगी। यह सिनेमा का शानदार उदाहरण है, लेकिन जिस समय फिल्म रिलीज होने वाली थी, उस वक्त हालात अलग थे। 1993 मुंबई बम धमाकों से जुड़े कई मामले अदालत में चल रहे थे और अंतिम फैसला आना बाकी था। ऐसे में किसी भी संस्था के लिए यह जरूरी था कि वह कानून और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करे।''

विक्रम भट्ट ने कहा, ''अगर कोई मामला अदालत में विचाराधीन हो और उस पर आधारित फिल्म रिलीज कर दी जाए, तो उसका असर लोगों की सोच पर पड़ सकता है। ऐसे में सेंसर बोर्ड का फैसला सही था। उनकी जिम्मेदारी अलग होती है। एक सरकारी संस्था होने के नाते सेंसर बोर्ड को सुनिश्चित करना पड़ता है कि किसी भी लंबित कानूनी मामले पर कोई ऐसा कंटेंट न आए, जो लोगों की राय को प्रभावित कर सके। उस समय बोर्ड ने अपने फैसले में इतना कहा था कि पहले अदालत का फैसला आने दिया जाए और उसके बाद फिल्म रिलीज की जाए।''

बातचीत के दौरान विक्रम भट्ट ने कहा, ''जैसे बाद में निर्भया केस पर 'दिल्ली क्राइम' सीरीज बनी और दर्शकों ने उसे पसंद भी किया। ऐसा इसलिए संभव हो पाया, क्योंकि उस मामले में कानूनी प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। जब न्यायिक फैसला सामने आ जाता है, तब उस विषय पर फिल्म या सीरीज बनाना और उसे रिलीज करना आसान हो जाता है। अगर मामला अभी अदालत में हो, तो स्थिति अलग होती है।''

गौरतलब है कि 'ब्लैक फ्राइडे' लेखक एस. हुसैन जैदी की किताब पर आधारित थी और इसमें 1993 मुंबई बम धमाकों की जांच और उससे जुड़े घटनाक्रम को दिखाया गया था। फिल्म का प्रीमियर 2004 में हुआ था, लेकिन कानूनी कारणों से इसे लंबे समय तक सिनेमाघरों में रिलीज की अनुमति नहीं मिली। आखिरकार अदालत का फैसला आने के बाद साल 2007 में फिल्म को रिलीज की मंजूरी मिली और इसके बाद इसे दर्शकों और समीक्षकों दोनों से खूब सराहना मिली।

--आईएएनएस

पीके/एबीएम

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