Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

ब्रिक्स देशों के वित्त मंत्रियों ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने पर दिया जोर, शुल्क बाधाओं को वैश्विक व्यापार के लिए बताया खतरा


मुंबई, 11 सितंबर (आईएएनएस)। ब्रिक्स देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों ने वैश्विक व्यापार पर बढ़ते शुल्क (टैरिफ) और गैर-शुल्क बाधाओं को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। मुंबई में आयोजित बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि ब्रिक्स समूह सीमा-पार भुगतान व्यवस्था को अधिक तेज, सस्ता, पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए व्यावहारिक समाधान तलाश रहा है।

मुंबई, 11 सितंबर (आईएएनएस)। ब्रिक्स देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों ने वैश्विक व्यापार पर बढ़ते शुल्क (टैरिफ) और गैर-शुल्क बाधाओं को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। मुंबई में आयोजित बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि ब्रिक्स समूह सीमा-पार भुगतान व्यवस्था को अधिक तेज, सस्ता, पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए व्यावहारिक समाधान तलाश रहा है।

संयुक्त बयान के अनुसार, ब्रिक्स पेमेंट टास्क फोर्स वर्तमान में विभिन्न सदस्य देशों की भुगतान प्रणालियों और संदेश विनिमय (मैसेजिंग) प्रणालियों के बीच बेहतर अंतरसंचालनीयता (इंटरऑपरेबिलिटी) विकसित करने पर काम कर रही है, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच होने वाले लेनदेन को अधिक कुशल, कम लागत वाला और आसानी से सुलभ बनाना है। समूह का मानना है कि ऐसी व्यवस्था व्यापार और निवेश को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी सहायक हो सकती है।

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि व्यापार और निवेश के निपटान में स्थानीय मुद्राओं का उपयोग किस प्रकार बढ़ाया जा सकता है। हालांकि ब्रिक्स देशों ने यह स्पष्ट किया कि सभी सदस्य देशों की आर्थिक और वित्तीय परिस्थितियां अलग-अलग हैं, इसलिए इस विषय पर कोई एक समान मॉडल लागू नहीं किया जा सकता। प्रत्येक देश अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप निर्णय लेगा।

ब्रिक्स वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक प्रमुखों ने टास्क फोर्स को सीमा-पार भुगतान प्रणालियों पर आगे भी चर्चा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। उनका मानना है कि अधिक प्रभावी भुगतान तंत्र से सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई गति मिलेगी।

यह मुद्दा 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन से पहले और अधिक महत्व प्राप्त कर रहा है। भारत भी केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं (सीबीडीसी) के बीच बेहतर अंतरसंचालनीयता को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास कर रहा है, हालांकि इस क्षेत्र में तकनीकी और नीतिगत चुनौतियां अभी बनी हुई हैं।

संयुक्त बयान में ब्रिक्स देशों ने कहा कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य अभी भी कई चुनौतियों से घिरा हुआ है, जिनमें भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार का विखंडन, संरक्षणवाद, नीतिगत अनिश्चितता, मुद्रास्फीति का दबाव, राजकोषीय जोखिम और बढ़ता वैश्विक ऋण प्रमुख हैं।

समूह ने विशेष रूप से एकतरफा शुल्क और गैर-शुल्क उपायों की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह की नीतियां वैश्विक व्यापार को विकृत करती हैं और विकासशील तथा उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर असमान रूप से अधिक बोझ डालती हैं। ब्रिक्स देशों ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) को वैश्विक व्यापार व्यवस्था का केंद्रीय आधार बताते हुए नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के प्रति अपना समर्थन दोहराया।

ब्रिक्स देशों ने वैश्विक वित्तीय संस्थानों में सुधार की आवश्यकता पर भी बल दिया। बयान में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं में विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

आईएमएफ के संदर्भ में समूह ने 16वीं सामान्य कोटा समीक्षा के तहत सहमत कोटा वृद्धि को जल्द लागू करने की मांग की। साथ ही 17वीं समीक्षा के दौरान सार्थक कोटा पुनर्संतुलन पर काम करने का आह्वान किया गया।

विश्व बैंक के संबंध में ब्रिक्स देशों ने कहा कि वर्ष 2025 की शेयरहोल्डिंग समीक्षा विकासशील देशों के ऐतिहासिक रूप से कम प्रतिनिधित्व को दूर करने और संस्था की वैधता को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

ब्रिक्स देशों ने न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) की भूमिका को और मजबूत करने का भी समर्थन किया। समूह ने स्थानीय मुद्राओं में वित्तपोषण, परियोजना तैयारी सुविधाओं, विविध वित्तीय स्रोतों और ब्रिक्स तथा ग्लोबल साउथ देशों में विकास परियोजनाओं के समर्थन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

संयुक्त बयान में भारत के उस प्रस्ताव का भी उल्लेख किया गया, जिसमें गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (गिफ्ट सिटी) में एक ब्रिक्स रिस्क लैब स्थापित करने की बात कही गई है। यह प्रस्ताव ब्रिक्स इंश्योरेंस रेजिलिएंस सेंटर पर चल रही चर्चाओं से जुड़ा हुआ है, जिसका उद्देश्य जोखिम मूल्यांकन मॉडल, सर्वोत्तम प्रक्रियाओं और विशेषज्ञ क्षमताओं को साझा करने के लिए एक स्वैच्छिक मंच तैयार करना है।

--आईएएनएस

डीबीपी

Date & Time : 2026-09-11 19:15:02

Share:

Leave A Reviews

Related News