Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

ब्रिक्स संसदीय मंच में हरिवंश ने सतत और समावेशी विकास में संसदों की भूमिका पर दिया जोर


नई दिल्‍ली, 27 अक्‍टूबर (आईएएनएस)। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के पूर्ण सत्र को संबोधित किया। इस सत्र का विषय ‘निरंतरता : हमारे राष्ट्रों के लिए स्‍थायी और समावेशी भविष्य के निर्माण में संसद की प्रमुख भूमिका’ था।

नई दिल्‍ली, 27 अक्‍टूबर (आईएएनएस)। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के पूर्ण सत्र को संबोधित किया। इस सत्र का विषय ‘निरंतरता : हमारे राष्ट्रों के लिए स्‍थायी और समावेशी भविष्य के निर्माण में संसद की प्रमुख भूमिका’ था।

हरिवंश ने कहा कि वर्ष 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और निरंतरता के लिए निर्माण' विषय से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि सितंबर 2026 में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपनाई गई नई दिल्ली घोषणा ने स्‍थायी विकास और समावेशी विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की।

वैश्विक विकास संबंधी चुनौतियों पर विचार व्यक्त करते हुए हरिवंश ने कहा कि मानवता जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण क्षरण, जैव विविधता को नुकसान, संसाधनों की कमी, खाद्य एवं ऊर्जा असुरक्षा तथा बढ़ती असमानताओं सहित गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है।

संयुक्त राष्ट्र की सतत विकास लक्ष्य रिपोर्ट 2026 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पर्याप्त रुझान संबंधी आंकड़े उपलब्ध 139 लक्ष्यों में से केवल 15 प्रतिशत लक्ष्य ही वर्तमान में वर्ष 2030 तक हासिल किए जाने की दिशा में सही मार्ग पर हैं। उन्होंने कहा कि सततता केवल पर्यावरण से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि मूल रूप से यह मानवीय गरिमा, आर्थिक अवसरों, सामाजिक न्याय और सभी के लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने से संबंधित है।

विधायिकाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए राज्यसभा के उपसभापति ने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने में संसदों की विशिष्ट और अपरिहार्य भूमिका है। विधायी कार्यों, बजटीय निगरानी, जवाबदेही तंत्र और नागरिकों के प्रतिनिधित्व के माध्यम से संसदें सार्वजनिक नीतियों को लोकतांत्रिक वैधता प्रदान करती हैं और वैश्विक प्रतिबद्धताओं तथा स्थानीय स्तर पर की जाने वाली कार्रवाई के बीच की दूरी को कम करती हैं।

उन्होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए संसदों को सक्षम कानून बनाने, पर्याप्त संसाधन आवंटित करने, कार्यान्वयन की निगरानी करने और यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि समाज के सभी वर्गों की आवाज सुनी जाए।

भारत के दृष्टिकोण को विस्तार से बताते हुए हरिवंश ने कहा कि निरंतर विकास जन-केंद्रित, समावेशी और न्यायसंगत होना चाहिए। 'वसुधैव कुटुम्बकम' अर्थात पूरा विश्व एक परिवार है, प्राचीन भारतीय संस्कृति और दर्शन का मूल स्तंभ है। इस सिद्धांत और विकसित भारत-2047 की कल्‍पना से प्रेरित होकर भारत वैश्विक विकास प्रयासों में योगदान देने के साथ-साथ एक समृद्ध, सुदृढ़ और सतत राष्ट्र के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि भारत में, जहां लगभग दो-तिहाई आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है, निरंतर विकास के लिए युवा अनिवार्य भागीदार हैं। विकसित भारत युवा संसद जैसी पहलें युवा नागरिकों को लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़ने, नेतृत्व क्षमता विकसित करने और समावेशी एवं सतत भविष्य के निर्माण में नवोन्मेषी विचारों के माध्यम से योगदान देने के मंच प्रदान करती हैं।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग के विषय पर हरिवंश ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के लिए वैश्विक प्रतिक्रिया आवश्यक है। निरंतरता के लिए अधिक मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग, वित्त तक बेहतर पहुंच, प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान तथा ‘समान लेकिन विभेदित उत्तरदायित्व और संबंधित क्षमताओं’ के सिद्धांत का सम्मान आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विकासशील देशों को अपनी राष्ट्रीय परिस्थितियों और प्राथमिकताओं के अनुरूप सतत विकास को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त नीतिगत स्वतंत्रता और संसाधन उपलब्ध होने चाहिए।

हरिवंश ने कहा कि निरंतरता अंततः सुशासन, जवाबदेही और सामूहिक उत्तरदायित्व का विषय है। संसदीय कूटनीति, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान और सामूहिक पैरवी के माध्यम से संसदें वर्तमान और भावी पीढ़ियों के लिए एक स्‍थायी, समावेशी और समृद्ध विश्व के निर्माण में प्रभावशाली भूमिका निभा सकती हैं।

--आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी

Date & Time : 2026-10-27 21:40:02

Share:

Leave A Reviews

Related News