
मैहर। नगर परिषद रामनगर इन दिनों दोहरी समस्या से जूझ रही है। एक तरफ नगर परिषद प्रबंधन का आरोप है कि कर्मचारी नगर के काम नहीं कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें कई महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिसके कारण वे निजी काम करने को मजबूर हैं।
खबर के मुताबिक *"नगर परिषद के कर्मचारी परिषद के मूल कार्य नहीं करते और पैसा लेकर ग्राम पंचायत क्षेत्रों में निजी काम कर रहे हैं।"
अधिकारियों के अनुसार नगर परिषद की मैन पावर सप्लाई का अनुबंध शासन के निर्देश पर एक आउटसोर्स एजेंसी को सौंपा जा चुका है। लेकिन अधिकांश कर्मचारी इस आउटसोर्स व्यवस्था में काम करने को तैयार नहीं हैं। कर्मचारी केवल सुबह-शाम नगर परिषद कार्यालय आकर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करते हैं, लेकिन वार्डों में सफाई, स्ट्रीट लाइट सुधार जैसे मुख्य कार्य नहीं करते।
इसका ताजा उदाहरण वायरल हुई एक तस्वीर है, जिसमें नगर परिषद की सरकारी सीढ़ी लगाकर दो कर्मचारी एक ग्राम पंचायत के निजी मकान में बिजली पोल पर लाइट फिटिंग का काम करते दिख रहे हैं। फोटो में तीसरा व्यक्ति पास में खड़ा है। परिषद का कहना है कि यह सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग है।
दूसरी ओर कर्मचारियों ने अपनी व्यथा बताई। कर्मचारियों का कहना है कि नगर परिषद द्वारा मैन पावर आउटसोर्स करने के बाद से उनका भुगतान फंस गया है।
कर्मचारियों की मांग है कि वे आउटसोर्स एजेंसी के अधीन काम नहीं करना चाहते। आउटसोर्स में वेतन कम मिलने और नौकरी की असुरक्षा के कारण वे चाहते हैं कि पहले की तरह सीधे नगर परिषद से ही उन्हें पारिश्रमिक मिले। वे नियमित रूप से सुबह-शाम ऑनलाइन हाजिरी भी लगा रहे हैं।
लेकिन इस मांग और अनुबंध के पेंच के कारण कई महीनों से उनका पारिश्रमिक लंबित है।
एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया - "साहब 7से 8महीने से एक रुपया नहीं मिला। घर में राशन, बच्चों की फीस, सब कैसे चलेगा? हम कोई चोरी नहीं कर रहे। परिवार पालने के लिए ड्यूटी के बाद जो छोटा-मोटा बिजली का काम मिल जाता है, कर लेते हैं। अगर परिषद हमारा वेतन दे दे और आउटसोर्स का समाधान कर दे, तो हमें बाहर काम करने की कोई जरूरत नहीं।"
इस पूरे विवाद का खामियाजा आम जनता भुगत रही है। नगर के कई वार्डों में नालियां जाम हैं, कचरा समय पर नहीं उठ रहा और स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी हैं।
स्थानीय नागरिकों और जागरूक लोगों ने कलेक्टर मैहर और मुख्य नगर पालिका अधिकारी रामनगर से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए। आउटसोर्स अनुबंध और वेतन भुगतान के विवाद का जल्द से जल्द निराकरण किया जाए, ताकि कर्मचारियों को उनका हक मिल सके और नगर के विकास कार्य सुचारू रूप से चल सकें।
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