
पांढुर्णा जिले के कारघाट कामठी गांव से सरकारी तंत्र की एक बेहद डरावनी और गंभीर लापरवाही सामने आई है। यहाँ शनिवार को आंगनवाड़ी केंद्र से गर्भवती महिलाओं को वितरित किए गए पोषण आहार (सत्तू/लड्डू) के पैकेट के भीतर सांप का एक मृत बच्चा मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। यह पैकेट गांव की ही एक गर्भवती महिला को पोषण के लिए दिया गया था। गनीमत यह रही कि समय रहते पैकेट के भीतर मृत जीव को देख लिया गया और महिला ने इसका सेवन नहीं किया, जिससे एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। इस घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया और उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्र पर जमकर हंगामा किया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कारघाट कामठी गांव की रहने वाली गर्भवती महिला वच्छला बाई धुर्वे शनिवार को आंगनवाड़ी केंद्र से सरकार द्वारा मिलने वाला पोषण आहार का पैकेट लेकर अपने घर आई थीं। घर पहुंचने के बाद जब परिवार के सदस्यों ने महिला को खिलाने के उद्देश्य से लड्डू का पैकेट खोला, तो उसके अंदर का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। पैकेट के भीतर लड्डू के साथ सांप की प्रजाति का एक छोटा मृत बच्चा लिपटा हुआ स्पष्ट दिखाई दे रहा था। पीड़ित परिवार ने बिना देर किए तुरंत इसकी सूचना गांव के अन्य लोगों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और स्थानीय प्रशासन को दी। खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण आंगनवाड़ी केंद्र पर जमा हो गए और बच्चों व महिलाओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी।
मामले की संवेदनशीलता और ग्रामीणों के बढ़ते गुस्से को देखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी उषा पंदरे, नंदनवाड़ी नायब तहसीलदार और नंदनवाड़ी पुलिस बल के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारियों ने सबसे पहले उग्र ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत कराया और इसके बाद उस विवादित पोषण आहार के पैकेट को अपने कब्जे में ले लिया। अधिकारियों की मौजूदगी में घटना का आधिकारिक पंचनामा तैयार किया गया और मौके पर मौजूद गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी उषा पंदरे ने बताया कि पोषण आहार के उस विशिष्ट बैच के सैंपल को पूरी तरह से सुरक्षित रख लिया गया है और इसे विस्तृत प्रयोगशाला (Lab) जांच के लिए भेजा जा रहा है। प्रशासन अब इस बात की बारीकी से जांच कर रहा है कि यह मृत जीव पैकेट के भीतर किस स्तर पर पहुंचा—क्या यह फैक्ट्री में मैनुफैक्चरिंग और पैकेजिंग के दौरान ही बंद हो गया था, या फिर परिवहन (Transportation) और आंगनवाड़ी केंद्र के भंडारण (Storage) के दौरान इसमें कोई चूक हुई। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट सामने आते ही इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार एजेंसी या कर्मचारियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक और आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।
इस खूनी और घिनौनी घटना के बाद से क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और परिजनों में डर और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार एक तरफ कुपोषण मिटाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर ऐसी घटिया और जानलेवा सामग्री बांटी जा रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जिले की सभी आंगनवाड़ियों में सप्लाई होने वाले पोषण आहार की गुणवत्ता की नियमित और कड़ी जांच की जाए। दूसरी ओर, स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए लोगों से किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने और आधिकारिक जांच पूरी होने तक धैर्य बनाए रखने की अपील की है।
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