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लॉकडाउन में बर्बरता दिखाने वाले 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा, साथानकुलम पिता-पुत्र हत्याकांड में मदुरै जिला अदालत का बड़ा फैसला

मदुरै: तमिलनाडु के मदुरै जिले की एक अदालत ने सोमवार को देश को झकझोर देने वाले साथानकुलम कस्टोडियल डेथ (हिरासत में मौत) मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने व्यापारी पी. जयराज और उनके बेटे जे. बेनिक्स की बर्बर हत्या के मामले में दोषी पाए गए 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा (फांसी) सुनाई है। 6 साल पहले हुई इस घटना ने पूरे देश में पुलिसिया बर्बरता के खिलाफ जनाक्रोश पैदा कर दिया था।

इन दोषियों को मिली फांसी की सजा मृत्युदंड पाने वाले नौ पुलिसकर्मियों में इंस्पेक्टर श्रीधर, सब-इंस्पेक्टर बालकृष्णन और रघु गणेश, और पुलिसकर्मी मुरुगन, समदुरई, मुथुराज, चेल्लादुरई, थॉमस फ्रांसिस और वेलुमुथु शामिल हैं।

"सत्ता का दुरुपयोग और रूह कंपा देने वाली क्रूरता" अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा कि यह मामला "सत्ता के दुरुपयोग" का एक चरम उदाहरण है। न्यायाधीश ने टिप्पणी की, "पिता और पुत्र को निर्वस्त्र किया गया और उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई... इसके बारे में पढ़कर ही रूह कांप जाती है।" कोर्ट ने यह भी कहा कि तमिलनाडु में कई ईमानदार अधिकारी हैं और यह फैसला पुलिस के बीच डर पैदा करने के लिए नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने के लिए है।

CBI ने माना 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' केस मद्रास हाईकोर्ट के निर्देश पर इस मामले की जांच संभालने वाली सीबीआई (CBI) ने इसे 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (Rarest of Rare) मामला बताते हुए अधिकतम सजा की मांग की थी। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि तीन चश्मदीद गवाहों की गवाही और अपराध की भीषण प्रकृति ने समाज की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है।

क्या था पूरा मामला? यह खौफनाक घटना 19 जून 2020 की है, जब लॉकडाउन के दौरान मोबाइल की दुकान चलाने वाले जयराज और उनके बेटे बेनिक्स को कथित तौर पर निर्धारित समय के बाद दुकान खुली रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था (हालांकि बाद में यह आरोप गलत पाया गया)। उन्हें साथानकुलम पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहाँ रात भर उन्हें अमानवीय यातनाएं दी गईं। परिजनों ने आरोप लगाया था कि उन्हें लाठियों और हथियारों से इतनी बेरहमी से पीटा गया कि उनके प्राइवेट पार्ट्स से खून बहने लगा था। हिरासत में लेने के कुछ दिनों के भीतर ही पिता और पुत्र दोनों की मौत हो गई।

महिला कांस्टेबल की गवाही बनी टर्निंग पॉइंट इस मामले के ट्रायल के दौरान 100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए। जांच में एक महिला कांस्टेबल की गवाही सबसे महत्वपूर्ण साबित हुई, जिसने खुलासा किया कि पिता-पुत्र को पूरी रात पीटा गया था और थाने की मेजों व लाठियों पर खून के धब्बे मौजूद थे। पुलिस ने सबूत मिटाने के लिए सीसीटीवी फुटेज को भी डिलीट करने की कोशिश की थी, लेकिन सीबीआई ने कड़ियां जोड़कर दोषियों को कानून के शिकंजे तक पहुंचाया।

यह फैसला भारत में पुलिस हिरासत में होने वाली हिंसा के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।


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