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नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार: गढ़चिरोली में 11 माओवादियों का आत्मसमर्पण, गृह मंत्री अमित शाह का 'मार्च 2026' तक पूर्ण सफाए का संकल्प

गढ़चिरोली। महाराष्ट्र के गढ़चिरोली जिले में सुरक्षा बलों को एक और बड़ी सफलता मिली है। गुरुवार को पांच वरिष्ठ सदस्यों समेत कुल 11 माओवादी उग्रवादियों ने पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, यह घटनाक्रम क्षेत्र में वामपंथी उग्रवाद (LWE) के कमजोर होते आधार और सुरक्षा बलों के बढ़ते प्रभाव का स्पष्ट प्रमाण है। आत्मसमर्पण करने वाले इस समूह में छह महिलाएं शामिल हैं और इन सभी पर संयुक्त रूप से 68 लाख रुपये का इनाम घोषित था। गढ़चिरोली पुलिस की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, इन नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है।

वरिष्ठ कैडरों का मोहभंग: एक साल में 123 नक्सलियों ने छोड़े हथियार

आत्मसमर्पण करने वालों में 'डिविजनल कमेटी' सदस्य सोनी उर्फ बाली वट्टे मट्टामी (45) और 'एरिया कमेटी' सचिव बुदारी उर्फ रामबत्ती मट्टामी (40) जैसे हाई-प्रोफाइल नाम शामिल हैं। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में जिले में कुल 123 सशस्त्र माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। छत्तीसगढ़ सीमा से सटे इस जिले में कभी नक्सली गतिविधियों का बोलबाला था, लेकिन अब पुलिस का दावा है कि ये गतिविधियां केवल भामरागड उपमंडल के कुछ सीमित सीमावर्ती क्षेत्रों तक सिमट कर रह गई हैं। विशेष पुलिस महानिरीक्षक संदीप पाटिल ने शेष माओवादी सदस्यों से भी अपील की है कि वे हिंसा त्याग कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ें।

मुख्यमंत्री के सामने हुआ था ऐतिहासिक आत्मसमर्पण

पुलिस ने पिछले साल अक्टूबर की एक महत्वपूर्ण घटना का भी उल्लेख किया, जब शीर्ष माओवादी नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति ने 61 अन्य वरिष्ठ कैडरों के साथ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। इस तरह के बड़े स्तर पर हो रहे आत्मसमर्पणों ने नक्सली संगठन की कमर तोड़ दी है। सुरक्षा बलों के "ऑपरेशन" और सरकार की "पुनर्वास नीतियों" के तालमेल ने नक्सलियों को हथियार डालने के लिए मजबूर किया है।

लक्ष्य 'मार्च 2026': नक्सलवाद मुक्त भारत की ओर कदम

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक भारत से नक्सलवाद को पूरी तरह से जड़ से खत्म करने का कड़ा संकल्प लिया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र और ओडिशा जैसे प्रभावित राज्यों में सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ विकास कार्यों को भी युद्ध स्तर पर तेज किया गया है। गृह मंत्रालय की रणनीति के तहत प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों, स्कूलों और अस्पतालों का जाल बिछाया जा रहा है ताकि युवाओं को भटकने से रोका जा सके। पिछले कुछ वर्षों में नक्सली हिंसा की घटनाओं में आई भारी गिरावट सरकार के इस मिशन की सफलता को दर्शाती है।

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