
नई दिल्ली. नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और जल-प्रलय (जिसमें 150 से अधिक लोगों की मौत और सैकड़ों लापता हैं) के बाद अब भारत के सामरिक और भूवैज्ञानिक विशेषज्ञों की नजर चीन के तिब्बत में बन रहे विशाल मेडॉग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (Medog Hydropower Project) पर टिक गई है. अरुणाचल प्रदेश की सीमा के पास ब्रह्मपुत्र नदी (तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो) पर चीन द्वारा बनाए जा रहे 60,000 मेगावाट क्षमता के इस बांध को विशेषज्ञों ने पूर्वोत्तर भारत के लिए एक 'वॉटर बम' करार दिया है.
यह विशाल परियोजना जिस स्थान पर बनाई जा रही है, वह अत्यधिक संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्र (Seismic Zone) में आता है. हाल ही में जुलाई में 'सेडिमेंट्री जियोलॉजी एंड टेथियन जियोलॉजी' जर्नल में प्रकाशित चीनी सरकारी भूवैज्ञानिकों की स्टडी के अनुसार, मेडॉग परियोजना स्थल के ठीक नीचे 'पेइज़ेन फॉल्ट' (Peizen Fault) नाम की एक बेहद सक्रिय भूकंपीय रेखा मौजूद है.
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस क्षेत्र में बड़ा भूकंप या भूस्खलन (Landslide) आता है, तो बांध टूटने या भारी मात्रा में अचानक पानी छोड़े जाने से अरुणाचल प्रदेश, असम और आगे बांग्लादेश तक भयानक जल-प्रलय आ सकती है. उन्होंने चेतावनी दी है कि दुनिया के सबसे संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्र में इतना विशाल बांध बनाना पूर्वोत्तर भारत और बांग्लादेश के करोड़ों लोगों के लिए तबाही का कारण बन सकता है.
उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए आगाह किया कि यदि 60,000 MW की यह परियोजना पूरी होती है, तो उत्तर-पूर्वी भारत में नेपाल से भी कई गुना बड़ी त्रासदी हो सकती है. अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू पहले ही चीन के इस बांध को राज्य के लिए "अस्तित्व का खतरा" (Existential Threat) घोषित कर चुके हैं.
भारत और चीन के बीच पारदर्शी जल-साझाकरण संधि (Water-Sharing Treaty) नहीं है. नेपाल आपदा के दौरान भी तिब्बत की ओर से अचानक आए भारी जलप्रवाह को लेकर पूर्व चेतावनी (Early Warning) न देने के आरोप लगे हैं. अमेरिकी-तिब्बती वकील तेनजिन त्सरिंग के अनुसार, चीन भविष्य में भारत के खिलाफ भी जल-प्रवाह को एक रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकता है.
चीन के इस 'वॉटर बम' के असर को बेअसर करने के लिए भारत सरकार अरुणाचल प्रदेश में सिआंग नदी पर 11,000 मेगावाट का 'सिआंग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट' (Siang Upper Multipurpose Project) बना रही है. यह विशाल जलाशय चीन की ओर से अचानक छोड़े गए पानी को रोककर flood cushion की तरह काम करेगा, जिससे असम और अरुणाचल को अचानक आई बाढ़ से बचाया जा सके.
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