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दिल्ली दंगा मामला: कड़कड़डूमा कोर्ट ने सभी 13 आरोपियों को किया बरी, पुलिस जांच और प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल


नई दिल्ली. वर्ष 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के गौतम विहार इलाके में हुए भीषण दंगों से जुड़े एक महत्वपूर्ण आपराधिक मामले में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने अपना बड़ा फैसला सुनाया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) प्रवीण सिंह की अदालत ने सबूतों के भारी अभाव और दिल्ली पुलिस की जांच प्रक्रिया में कई गंभीर खामियों को आधार बनाते हुए मामले के सभी 13 आरोपियों को बरी (Acquit) कर दिया है।

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि अभियोजन पक्ष (Prosecution) आरोपियों के खिलाफ लगाए गए जानलेवा हमले और सोची-समझी साजिश के गंभीर आरोपों को निष्पक्ष और ठोस साक्ष्यों के साथ साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है।

1. साजिश और हथियार बरामदगी पर कोर्ट का सख्त रुख

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि दिल्ली दंगों के दौरान एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने के लिए पूर्व-नियोजित साजिश रची गई थी। हालांकि, अदालत ने पुलिस की इस थ्योरी को खारिज करते हुए कहा कि जांच एजेंसी यह साबित करने में असमर्थ रही कि यह कथित साजिश कब, कहां और किन-किन व्यक्तियों की मौजूदगी में रची गई।

इसके अलावा, पुलिस द्वारा आरोपी मोहम्मद जावेद और शाहजाद खान की निशानदेही पर यमुना नदी से तलवार और भाला बरामद करने के दावे पर भी कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि केवल हथियारों की बरामदगी मात्र से साजिश का अस्तित्व सिद्ध नहीं हो जाता, खासकर तब जब पुलिस उन हथियारों का अपराध स्थल (Crime Scene) से सीधा संबंध साबित न कर सकी हो।

2. कानूनी प्रक्रिया में घोर लापरवाही और धुंधली CCTV फुटेज

कोर्ट ने मामले में आठ आरोपियों को उद्घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) घोषित करने की पुलिसिया प्रक्रिया में भी कानून का स्पष्ट उल्लंघन पाया:

  • प्रक्रियात्मक खामी: पुलिस ने कानूनी नियमों के तहत तय तीन चरणों की अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया। न तो आरोपियों के पते पर उद्घोषणा पढ़कर सुनाई गई और न ही चस्पा करने के वैध साक्ष्य पेश किए गए।

  • पहचान का अभाव: घटना स्थल से जुड़े सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) इतने धुंधले थे कि उसमें किसी भी आरोपी की स्पष्ट पहचान संभव नहीं थी।

  • बयानों में विरोधाभास: प्रत्यक्षदर्शियों और गवाहों के बयानों में आपस में काफी विरोधाभास पाया गया, जिससे अभियोजन पक्ष का पूरा मामला कमजोर पड़ गया।

क्या था गौतम विहार में हुए हमले का पूरा मामला?

यह मामला रमण नामक व्यक्ति की शिकायत पर दर्ज एफआईआर (FIR) से संबंधित था। शिकायतकर्ता के अनुसार, 25 फरवरी 2020 की शाम जब वह गौतम विहार क्षेत्र में मौजूद था, तब फूल वाली मस्जिद की ओर से आए 15-20 लोगों की हथियारबंद भीड़ ने उस पर डंडों और तलवारों से हमला कर दिया था, जिसमें उसे सिर और पीठ पर गंभीर चोटें आई थीं।

पुलिस ने इसी शिकायत के आधार पर 13 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर चार्जशीट दाखिल की थी, लेकिन कोर्ट में ठोस तकनीकी व प्रत्यक्ष साक्ष्य प्रस्तुत न करने पाने के कारण सभी आरोपी दोषमुक्त हो गए।

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