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देशभर के 768 नशा-मुक्ति केंद्रों से 8.20 लाख से अधिक लोगों को मिला इलाज और पुनर्वास का लाभ


नई दिल्ली, 4 जुलाई (आईएएनएस)। देश भर के 768 नशा-मुक्ति केंद्रों में 8.20 लाख से ज्यादा लोग सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग की इलाज और पुनर्वास सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं।

नई दिल्ली, 4 जुलाई (आईएएनएस)। देश भर के 768 नशा-मुक्ति केंद्रों में 8.20 लाख से ज्यादा लोग सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग की इलाज और पुनर्वास सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने आम जनता, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों, संबंधित मंत्रालयों और नागरिक समाज सहित सभी हितधारकों से मिलकर और तालमेल के साथ काम करने का आह्वान किया है।

सचिव सुधांश पंत ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में, मंत्रालय ने देश भर में 768 नशा-मुक्ति और पुनर्वास केंद्र खोलकर इलाज और पुनर्वास सेवाओं का विस्तार किया है।

पंत ने आगे कहा कि इन सेवाओं में बढ़ता भरोसा इस बात से दिखता है कि बिना किसी भेदभाव या शर्म के इलाज कराने वाले लोगों की संख्या में 294 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, यह संख्या 2020 में 2.08 लाख थी जो 2025 में बढ़कर 8.20 लाख से अधिक हो गई है।

मंत्री वीरेंद्र कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार 'पूरे-सरकार और पूरे-समाज' के दृष्टिकोण के माध्यम से नशा-मुक्त समाज बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मंत्री ने कहा कि 2019 में भारत में 'नशीले पदार्थों के सेवन के स्तर' पर मंत्रालय के पहले राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण से इस समस्या का दायरा और स्पष्ट हुआ। उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण के नतीजों से पता चला कि 7 करोड़ से अधिक लोग नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़ी समस्या (सब्सटेंस यूज डिसऑर्डर) से प्रभावित थे, जिनमें लगभग 1.2 करोड़ बच्चे और 58 लाख महिलाएं शामिल थीं।

वीरेंद्र कुमार ने कहा कि नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ लड़ाई जागरूकता, लोगों पर केंद्रित उपायों, विभिन्न क्षेत्रों के बीच तालमेल, सहानुभूति और साझा जिम्मेदारी के आधार पर लड़ी जानी चाहिए।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने 'नशीले पदार्थों की मांग कम करने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीडीडीआर)' शुरू की। यह एक व्यापक रूपरेखा है जिसका उद्देश्य रोकथाम, जागरूकता पैदा करना, क्षमता निर्माण, इलाज, पुनर्वास और समाज में फिर से शामिल करना है।

बयान में कहा गया है कि इन प्रयासों को और मजबूत करने के लिए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'नशा-मुक्त भारत' बनाने के विजन के अनुरूप 2020 में 'नशा-मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए)' शुरू किया गया था।

पिछले महीने, उत्तराखंड के हरिद्वार में देव संस्कृति विश्वविद्यालय (डीएसवीवी) में 17 से 26 जून तक मनाए गए 'नशा-मुक्त भारत सप्ताह' में 1.31 करोड़ से अधिक नागरिकों ने भाग लिया। बयान में कहा गया है कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग सभी नागरिकों, संस्थाओं, युवा संगठनों, शिक्षण संस्थानों और समुदाय के लोगों से इस राष्ट्रीय अभियान में साथ मिलकर काम करने और 'नशा मुक्त भारत, खुशहाल भारत' के विजन को साकार करने में योगदान देने का आग्रह करता है।

उन्होंने बताया कि मंत्रालय की टोल-फ्री नशा-मुक्ति हेल्पलाइन 14446 पर 4.69 लाख कॉल आए हैं, जो मदद चाहने वाले लोगों और परिवारों के लिए संपर्क का पहला जरिया बनी है। उन्होंने यह भी कहा कि एनएमबीए ऐप 2.0 के लॉन्च से राज्यों, जिलों, आध्यात्मिक संगठनों और अन्य लोगों को एनएमबीए के तहत फील्ड-आधारित गतिविधियों का डेटा रियल-टाइम में अपलोड करने में मदद मिलती है, जिसमें नागरिकों के लिए कई नए फीचर्स भी शामिल हैं।

--आईएएनएस

एससीएच/एमएस

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