नई दिल्ली, 6 सितंबर (आईएएनएस)। राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में गिरी कई मंजिला इमारतों से एक व्यक्ति की मौत हो गई और छह लोगों को अब तक बचाया जा चुका है। वहीं, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मौके पर पहुंचकर घटना का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों ने घटना और रेस्क्यू किए गए लोगों की रिपोर्ट ली।
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नई दिल्ली, 6 सितंबर (आईएएनएस)। राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में गिरी कई मंजिला इमारतों से एक व्यक्ति की मौत हो गई और छह लोगों को अब तक बचाया जा चुका है। वहीं, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मौके पर पहुंचकर घटना का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों ने घटना और रेस्क्यू किए गए लोगों की रिपोर्ट ली।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि यह इमारत 40-50 साल पुरानी थी, जिसमें एक बेसमेंट और पांच ऊपरी मंजिलें थीं और इसका इस्तेमाल पीजी (पेइंग गेस्ट) के तौर पर किया जा रहा था। घटना के समय बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। मलबे से एक निवासी को निकालकर एम्स के ट्रॉमा डिपार्टमेंट ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
एनएसयूआई के नेशनल प्रेसिडेंट विनोद जाखड़ ने आईएएनएस को बताया कि घटना के बारे में पता चलने के बाद हम तुरंत उस जगह पहुंचे... हो सकता है कि हमारा कोई एनएसयूआई सदस्य भी वहां फंसा हो। हमने खुद तीन लोगों को बाहर निकाला।
इस बीच, दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक स्टूडेंट ने इस घटना के बारे में बताया। उसने बताया कि दोपहर का खाना खाने के तुरंत बाद हमें लगा कि इलाके में भूकंप आया है। हम चौथी मंजिल पर थे और महसूस कर सकते थे कि उस समय पूरी बिल्डिंग हिल रही थी। हम बालकनी में आए तो देखा कि चारों तरफ धूल ही धूल थी। फिर भी, हमें लगा कि यह भूकंप का असर है।
नीचे आने के बाद ही हमें पता चला कि एक इमारत गिर गई है। पुलिस या फायर ब्रिगेड के पहुंचने से पहले ही, मैंने और कुछ अन्य लोगों ने मलबे से एक व्यक्ति को बाहर निकाला।
उन्होंने आगे कहा कि इलाके में अफरातफरी मची हुई है। हमारे माता-पिता लगातार फोन कर रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि अब यहां रहना सुरक्षित है।
हालात के बारे में बताते हुए एक और चश्मदीद ने कहा कि मलबे के नीचे अभी भी करीब 20-30 लोग फंसे हो सकते हैं।
आईएएनएस से बात करते हुए उन्होंने दावा किया कि हम मदद के लिए गए थे। हमने दो बच्चों को बचाया जिनकी सांसें चल रही थीं। दो और बच्चे वहां फंसे हुए थे और मदद के लिए पुकार रहे थे। हमने उन्हें बचाने की कोशिश में उनके हाथ पकड़े, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
--आईएएनएस
एमएस/
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