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दिव्य स्वरूप में सजे बाबा महाकाल ने दिए भक्तों को दर्शन, 'जय श्री महाकाल' के जयकारे


उज्जैन, 31 मई (आईएएनएस)। ज्येष्ठ अधिकमास की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के पावन अवसर पर रविवार को बाबा महाकाल के पट भोर चार बजे खुले। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल के अलौकिक रूप के दर्शन हुए, पूरा परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।

उज्जैन, 31 मई (आईएएनएस)। ज्येष्ठ अधिकमास की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के पावन अवसर पर रविवार को बाबा महाकाल के पट भोर चार बजे खुले। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल के अलौकिक रूप के दर्शन हुए, पूरा परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।

मंदिर के पट खुलने के साथ ही मंत्रोच्चार के बीच बाबा महाकाल का हरिओम जल, पंचामृत, दूध और दही से अभिषेक किया गया। बाबा का आकर्षक शृंगार करने के बाद भस्म आरती की गई।

मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन किए। अपने आराध्य देव के दर्शन पाने के लिए देश-विदेश से आए श्रद्धालु देर रात से ही लंबी कतारों में खड़े नजर आए।

सुबह भोर में भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। कपाट खुलते ही पूरे परिसर में 'जय श्री महाकाल' के जयकारे गूंज उठे। मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा।

कपाट खुलने के बाद सबसे पहले भगवान को जल अर्पित किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने पंचामृत से बाबा महाकाल का दिव्य अभिषेक किया गया। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयकारों और शंखनाद से गूंजता रहा।

बता दें कि बाबा महाकाल के 'निराकार से साकार' रूप का अर्थ शिव के उस आध्यात्मिक और दार्शनिक रूपांतरण से है, जिसमें अनंत, रूपहीन और सर्वव्यापी परमात्मा (निराकार) भक्तों के कल्याण के लिए एक निश्चित और पूजनीय स्वरूप (साकार) में प्रकट होते हैं।

अधिकमास के इस पावन योग में बाबा महाकाल के दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है। यही वजह है कि देश-विदेश से बड़ी संख्या में भक्त इस आरती को देखने के लिए आते हैं। मंदिर में दर्शन के लिए आम लोगों से लेकर कई बड़ी हस्तियां भी पहुंचती रहती हैं।

--आईएएनएस

एसडी/एएस

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