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दो साल बाद जमानत पर जेल से बाहर आए झारखंड के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल ने ‘जश्न’ पर कसा तंज


रांची, 14 मई (आईएएनएस)। झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग के बहुचर्चित टेंडर कमीशन घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के केस में करीब दो साल से जेल में बंद पूर्व मंत्री आलमगीर आलम बुधवार को रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार से जमानत पर रिहा हो गए। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई की प्रक्रिया पूरी हुई। उनकी पत्नी निशात आलम जमानतदार बनीं।

रांची, 14 मई (आईएएनएस)। झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग के बहुचर्चित टेंडर कमीशन घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के केस में करीब दो साल से जेल में बंद पूर्व मंत्री आलमगीर आलम बुधवार को रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार से जमानत पर रिहा हो गए। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई की प्रक्रिया पूरी हुई। उनकी पत्नी निशात आलम जमानतदार बनीं।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ही उन्हें जमानत दे दी थी, लेकिन आदेश की प्रति आधिकारिक पोर्टल पर समय पर अपलोड न होने के कारण मंगलवार को उनकी रिहाई मुमकिन नहीं हो सकी थी। आलमगीर आलम और उनके निजी सचिव संजीव लाल मई 2024 से ही न्यायिक हिरासत में थे। निचली अदालत और झारखंड हाईकोर्ट से राहत न मिलने पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। रिहाई के दौरान जेल के बाहर उनके समर्थकों ने जश्न मनाया, आतिशबाजी की और मिठाइयां बांटीं।

हालांकि, इस जश्न पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इसे 'बाइज्जत बरी' होने के बजाय उम्र और बीमारी के आधार पर मिली महज एक 'अंतरिम राहत' करार दिया है।

बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा, "जमानत पर ऐसा जश्न मनाया जा रहा है मानो कोई क्रांतिकारी आजादी की लड़ाई लड़कर लौटा हो। क्या करोड़ों की काली कमाई और गरीबों के हक पर डाका डालना उत्सव मनाने वाली उपलब्धि है?" उन्होंने उस घटना की याद दिलाई जब आलमगीर आलम के निजी सचिव के सहायक जहांगीर आलम के घर से नोटों का पहाड़ (करीब 32.20 करोड़ रुपए) मिला था, जिसे गिनने के लिए मशीनें मंगानी पड़ी थीं।

मरांडी ने चेतावनी देते हुए कहा कि सत्ता और संसाधनों के दम पर राहत मिल सकती है, लेकिन भ्रष्टाचार का दाग आसानी से नहीं मिटता। उन्होंने लालू प्रसाद यादव के कानूनी सफर का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे मामलों की परछाई अंत तक पीछा नहीं छोड़ती। यह मामला ग्रामीण विकास विभाग में संगठित टेंडर कमीशन नेटवर्क से जुड़ा है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के अनुसार, सरकारी टेंडर आवंटित करने के बदले कुल ठेके की राशि का करीब तीन प्रतिशत कमीशन वसूला जाता था। इसमें से 1.35 प्रतिशत राशि कथित तौर पर तत्कालीन मंत्री तक पहुंचाई जाती थी। 6 मई 2024 को हुई छापेमारी में जहांगीर आलम के आवास से 32.2 करोड़ रुपए, जबकि संजीव लाल के आवास और कार्यालय से लाखों रुपए नकद बरामद हुए थे। इसी मामले में ईडी ने 15 मई 2024 को आलमगीर आलम को गिरफ्तार किया था।

--आईएएनएस

एसएनसी/

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