नई दिल्ली, 5 मार्च (आईएएनएस)। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 खत्म हुए अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है, लेकिन इस सम्मेलन से निकला संदेश भारत की सीमाओं से बाहर तक सुनाई देने लगा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, यह समिट सिर्फ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नैतिक और मानव-केंद्रित उपयोग पर ही केंद्रित नहीं था, बल्कि इससे एक बड़ा रणनीतिक बदलाव भी सामने आया है।
नई दिल्ली, 5 मार्च (आईएएनएस)। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 खत्म हुए अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है, लेकिन इस सम्मेलन से निकला संदेश भारत की सीमाओं से बाहर तक सुनाई देने लगा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, यह समिट सिर्फ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नैतिक और मानव-केंद्रित उपयोग पर ही केंद्रित नहीं था, बल्कि इससे एक बड़ा रणनीतिक बदलाव भी सामने आया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अपनी सशस्त्र सेनाओं को एआई-आधारित युद्ध के दौर के लिए तैयार कर रहा है।
कई दशकों तक किसी देश की सैन्य ताकत का आकलन उसकी सेना के आकार, टैंकों की संख्या और मिसाइलों की मारक क्षमता से किया जाता था। लेकिन अब यह समीकरण बदल रहा है। आधुनिक युद्धों में जानकारी हासिल करने की गति और तेजी से निर्णय लेने की क्षमता भी उतनी ही अहम होती जा रही है जितनी कि हथियारों की ताकत।
रक्षा रणनीतिकार अब अक्सर ओओडीए लूप की बात करते हैं, जिसका मतलब है 'ऑब्जर्व, ओरिएंट, डिसाइड और एक्ट', यानी स्थिति को देखना, समझना, फैसला लेना और तुरंत कार्रवाई करना। किसी भी सेना की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह इन चार चरणों को कितनी तेजी से पूरा कर सकती है।
समिट के दौरान स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड ने चुपचाप एक नया स्वदेशी एआई टूल पेश किया, जो भारत की सीमा निगरानी के तरीके को काफी हद तक बदल सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक यह सिस्टम सैटेलाइट तस्वीरों, ड्रोन फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक डेटा का विश्लेषण करके लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पास संभावित सैन्य गतिविधियों का पता लगा सकता है।
इस एआई सिस्टम की सटीकता करीब 94 प्रतिशत बताई जा रही है। खास बात यह है कि यह टूल तंबू या सैन्य उपकरण जैसे स्पष्ट संकेत दिखने से पहले ही संभावित सैन्य जमावड़े की पहचान कर सकता है।
अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीक की मदद से सेना किसी भी असामान्य गतिविधि को शुरुआती चरण में ही पहचान सकती है और तेजी से प्रतिक्रिया दे सकती है।
अब सिर्फ मानव विश्लेषकों पर निर्भर रहने की बजाय यह एआई सिस्टम बड़ी मात्रा में डेटा को तेजी से प्रोसेस करता है और रियल-टाइम जानकारी उपलब्ध कराता है। इससे सैन्य कमांडरों को जमीन पर तनाव बढ़ने से पहले ही फैसले लेने में मदद मिलती है।
रिपोर्ट के अनुसार, समिट में यह भी सामने आया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को धीरे-धीरे सेना की तीनों शाखाओं में शामिल किया जा रहा है।
भारतीय सेना में एसएएम-यूएन प्लेटफॉर्म नाम का एक सिस्टम इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसकी मदद से पुराने टैंकों और बख्तरबंद वाहनों को अपग्रेड किया जा रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन पुराने सैन्य प्लेटफॉर्मों में एआई-आधारित फायर कंट्रोल सिस्टम जोड़े जा रहे हैं, जिससे वे आधुनिक युद्धक्षेत्र में भी प्रभावी बने रह सकते हैं और नई सैन्य गाड़ियों की पूरी नई फ्लीट खरीदने की जरूरत भी कम हो सकती है।
--आईएएनएस
डीबीपी/
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