पुणे, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र में सियासी हलचल के बीच उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लेकर जारी ऑडियो क्लिप प्रकरण पर शिवसेना नेता संजय निरूपम ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने मौजूदा तकनीक के दुरुपयोग का हवाला देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की और कहा कि तथ्य सामने आने तक कोई अंतिम टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी। साथ ही शिवसेना नेता ने ईडी-सीबीआई जांच, मराठा आरक्षण और सीएम पद को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी पार्टी का पक्ष स्पष्ट किया।
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पुणे, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र में सियासी हलचल के बीच उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लेकर जारी ऑडियो क्लिप प्रकरण पर शिवसेना नेता संजय निरूपम ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने मौजूदा तकनीक के दुरुपयोग का हवाला देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की और कहा कि तथ्य सामने आने तक कोई अंतिम टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी। साथ ही शिवसेना नेता ने ईडी-सीबीआई जांच, मराठा आरक्षण और सीएम पद को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी पार्टी का पक्ष स्पष्ट किया।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लेकर मनोज जरांगे के आरोप पर शिवसेना नेता संजय निरूपम ने कहा, "एक ऑडियो क्लिप भी जारी की गई है, लेकिन हमें यह याद रखना चाहिए कि हम ऐसे दौर में जी रहे हैं जहां तकनीक विशेषकर एआई का व्यापक उपयोग हो रहा है। सोशल मीडिया पर अनेक पोस्ट, वीडियो और ऑडियो ऐसे होते हैं जो पूरी तरह फर्जी साबित होते हैं। कई बार किसी व्यक्ति के नाम से ऐसी बातें प्रसारित कर दी जाती हैं जो उसने कही ही नहीं होतीं। इसलिए इस समय यह कहना कि यह ऑडियो पूरी तरह सही है, जल्दबाजी होगी।"
उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जांच के बाद यह पता लगाया जाना चाहिए कि ऑडियो की वास्तविकता क्या है, इसमें जिन लोगों के नाम हैं और जो आवाजें सुनाई दे रही हैं, वे वास्तव में उन्हीं व्यक्तियों की हैं या नहीं। जब जांच के बाद सभी तथ्य स्थापित हो जाएं, तब पार्टी की ओर से स्पष्ट और ठोस रुख लिया जाना चाहिए। फिलहाल इस ऑडियो पर कोई भी अंतिम टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
संजय राउत की ईडी और सीबीआई जांच की मांग को लेकर शिवसेना नेता ने कहा कि हमारी पार्टी के नेताओं ने खुद मुख्यमंत्री से मिलकर इस पूरे प्रकरण की जांच कराने का अनुरोध किया है। अब जांच राज्य सरकार की एजेंसियां करेंगी या केंद्र सरकार की एजेंसियां, यह निर्णय राज्य सरकार को लेना होता है। यदि राज्य की एजेंसियां जांच करने में सक्षम न हों या सरकार को लगे कि मामले की निष्पक्ष जांच किसी केंद्रीय एजेंसी द्वारा होनी चाहिए, तब सीबीआई जांच की सिफारिश की जा सकती है। यह पूरा निर्णय मुख्यमंत्री को ही लेना होता है और वही इस पर अंतिम फैसला करेंगे।
उन्होंने कहा कि हम क्यों डरेंगे? मनोज जरांगे पाटिल मराठा युवाओं को न्याय दिलाने के लिए काम कर रहे हैं और स्वयं शिवसेना भी मानती है कि महाराष्ट्र के लाखों मराठा युवाओं की समस्याओं का समाधान होना चाहिए, चाहे वे रोजगार से जुड़ी हों या शिक्षा में आरक्षण से संबंधित। जब एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री थे, तब इस दिशा में कई प्रयास किए गए और उनके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए। इसलिए हमारी सोच और जरांगे पाटिल की सोच में कोई विरोधाभास नहीं है। वे जिन मुद्दों को उठा रहे हैं, वे मराठा समाज और महाराष्ट्र के हित से जुड़े हुए हैं, और शिवसेना भी उन्हीं हितों की पक्षधर है।
गुलाबराव पाटिल के बयान पर संजय निरूपम ने कहा कि गुलाबराव पाटिल हों या हमारी पार्टी के अन्य मंत्री, नेता और कार्यकर्ता, सभी की यह इच्छा होना स्वाभाविक है कि हमारे नेता एकनाथ शिंदे फिर से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनें। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। हर पार्टी के कार्यकर्ता चाहते हैं कि उनके नेता सर्वोच्च पद पर पहुंचें। एकनाथ शिंदे का मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल अच्छा रहा है और आज भी महाराष्ट्र में उनके काम की सराहना की जाती है। ऐसे में यदि कोई नेता या कार्यकर्ता उन्हें फिर से मुख्यमंत्री देखना चाहता है, तो वह केवल अपनी राजनीतिक आकांक्षा और अपेक्षा व्यक्त कर रहा है। इसमें किसी को आहत करने का कोई उद्देश्य नहीं है।
विपक्ष के अराजकता फैलाने के आरोप पर उन्होंने कहा कि विपक्ष स्वयं विभिन्न मुद्दों को लेकर माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहा है। चाहे वह मतदाता सूची का मुद्दा हो, चुनाव आयोग का विषय हो या अन्य राजनीतिक विवाद, विपक्ष और कॉकरोच जनता पार्टी ने कई स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन किए हैं लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। हमारा मानना है कि देश में शांति, सद्भाव और कानून का शासन बना रहना चाहिए, क्योंकि जितनी शांति होगी, उतनी ही तरक्की होगी और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनेगी।
लॉरेंस बिश्नोई को लेकर संजय राउत के बयान पर उन्होंने कहा कि यह बेहद गैर-जिम्मेदाराना बयान है। लॉरेंस बिश्नोई को लेकर विभिन्न एजेंसियों और मीडिया रिपोर्टों में जो जानकारी सामने आती रही है, उसके आधार पर उसे एक आपराधिक गिरोह से जुड़े व्यक्ति के रूप में देखा जाता है। विपक्ष को पूरा अधिकार है कि वह कानून-व्यवस्था और अपराध जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए तथा सरकार से जवाब मांगे, लेकिन किसी देश के गृह मंत्री की तुलना किसी अपराधी से करना उचित राजनीतिक विमर्श नहीं कहा जा सकता। शायद इसी कारण अब लोग संजय राउत के ऐसे बयानों को गंभीरता से नहीं लेते।
--आईएएनएस
केके/वीसी
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