Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

'एक्स' सरकारी कंटेंट हटाने के अनुरोधों को और ज्यादा पारदर्शी बनाएगा: एलन मस्क


नई दिल्ली, 16 अगस्त (आईएएनएस)। एलन मस्क ने घोषणा की है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स सरकारों के कंटेंट हटाने या उस पर रोक लगाने के अनुरोधों को अब यूजर्स के लिए ज्यादा पारदर्शी बनाएगा।

नई दिल्ली, 16 अगस्त (आईएएनएस)। एलन मस्क ने घोषणा की है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स सरकारों के कंटेंट हटाने या उस पर रोक लगाने के अनुरोधों को अब यूजर्स के लिए ज्यादा पारदर्शी बनाएगा।

यह कंटेंट मॉडरेशन, रेकमेंडेशन एल्गोरिदम और ऑनलाइन अभिव्यक्ति में आधिकारिक हस्तक्षेप को लेकर पारदर्शिता बढ़ाने की एक बड़ी पहल का हिस्सा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में मस्क ने कहा कि सरकारों द्वारा जरूरी की गई कोई भी सेंसरशिप अब साफ तौर पर दिखाई देगी।

इससे प्लेटफॉर्म का इरादा है कि सरकारी अधिकारियों के कहने पर की गई कार्रवाई के बारे में यूजर्स को ज्यादा जानकारी मिले। मस्क ने कहा, “सरकारों द्वारा जरूरी की गई कोई भी सेंसरशिप अब स्पष्ट रूप से दिखाई देगी।”

प्रस्तावित बदलावों के तहत एक्स यूजर्स यह देख पाएंगे कि कब सरकारें पोस्ट हटाने की मांग करती हैं या अकाउंट्स पर रोक लगाने का अनुरोध करती हैं। प्लेटफॉर्म यह भी बताने की योजना बना रहा है कि ऐसे अनुरोध किस एजेंसी ने किए हैं और जहां संभव हो, उसके लिए क्या कानूनी आधार या कारण बताया गया है।

यह कदम मस्क के उस बड़े कदम का हिस्सा है जिससे प्लेटफॉर्म के मॉडरेशन और कंटेंट-डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को और ज्यादा पारदर्शी बनाया जा सके।

एक्स पहले ट्विटर के नाम से जाना जाता था। हालांकि, इसे खरीदने के बाद से, मस्क ने बार-बार कहा है कि यूजर्स को इस बात की ज्यादा जानकारी होनी चाहिए कि ऑनलाइन कंटेंट को कैसे मॉडरेट और रैंक किया जाता है।

क्रिप्टो ब्रीफिंग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रिपोर्टिंग पीरियड के आधार पर, मस्क की ओनरशिप में एक्स ने 83 फीसदी से 98.8 फीसदी सरकारी टेकडाउन अपील का पालन किया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह कम्प्लायंस रेट प्लेटफॉर्म के पिछले मैनेजमेंट से ज्यादा है। एक्स अपने रिकमेंडेशन सिस्टम के बारे में ज्यादा पारदर्शिता देने के लिए भी काम कर रहा है।

कंपनी ने अपनी रिकमेंडेशन टेक्नोलॉजी के कुछ हिस्सों को ओपन-सोर्स करने की कोशिशों को समर्थन किया है, जिससे रिसर्चर्स और यूजर्स यह देख सकें कि कंटेंट-रैंकिंग मैकेनिज्म कैसे काम करते हैं और पोस्ट्स को कैसे प्रमोट या सप्रेस किया जाता है।

इस प्लेटफॉर्म का मकसद यूजर्स को उन फैक्टर्स के बारे में साफ जानकारी देना है जो कंटेंट की विजिबिलिटी पर असर डालते हैं, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या पोस्ट्स को आगे बढ़ा रहा है, आगे बढ़ने से रोक रहा है या उन पर रीच रिस्ट्रिक्शन्स हैं।

--आईएएनएस

केके/पीएम

Share:

Leave A Reviews

Related News