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एनसीएसटी ने प्रोफेसर की नियुक्ति को लेकर विश्वभारती विश्वविद्यालय अथॉरिटी को नोटिस भेजा


कोलकाता, 21 जून (आईएएनएस)। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) ने विश्वभारती विश्वविद्यालय (वीबीयू) के अधिकारियों को एक और नोटिस भेजकर विश्वविद्यालय के बंगाली विभाग में एक अनुसूचित जनजाति उम्मीदवार की एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति में अनियमितताओं के आरोपों पर जवाब मांगा है।

कोलकाता, 21 जून (आईएएनएस)। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) ने विश्वभारती विश्वविद्यालय (वीबीयू) के अधिकारियों को एक और नोटिस भेजकर विश्वविद्यालय के बंगाली विभाग में एक अनुसूचित जनजाति उम्मीदवार की एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति में अनियमितताओं के आरोपों पर जवाब मांगा है।

इस वर्ष फरवरी में इस मामले पर वीबीयू के कुलपति से रिपोर्ट मांगी गई थी। विश्वविद्यालय द्वारा कोई जवाब न मिलने पर, एनसीएसटी ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों को एक बार फिर नोटिस भेजा है।

इस बार आयोग ने कुलपति डॉ. प्रोबीर कुमार घोष से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। वीबीयू को सात दिनों के भीतर शिकायत से संबंधित सभी जानकारी और की गई कार्रवाई पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।

अपने नोटिस में आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि निर्धारित समय के भीतर जवाब नहीं मिलता है, तो संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए विश्वविद्यालय के अधिकारियों को तलब किया जा सकता है।

कल्याणी विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर तुषार पटुआ ने जनवरी में आयोग को लिखित शिकायत दी थी, जिसमें उन्होंने बंगाली विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर (एसटी) के पद की भर्ती प्रक्रिया में कई अनियमितताओं का आरोप लगाया था और कहा था कि योग्य उम्मीदवारों को साक्षात्कार से बाहर रखा गया था। आयोग ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू की।

पटुआ का दावा है कि विश्वविद्यालय की चुप्पी ने भर्ती प्रक्रिया पर और भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

जनवरी में, बंगाली विभाग में सहायक और एसोसिएट प्रोफेसर के पदों के लिए साक्षात्कार स्थगित होने के बाद प्रकाशित प्रारंभिक सूची को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। कई उम्मीदवारों ने चयन मानदंडों और उन्हें बाहर रखे जाने के कारणों पर सवाल उठाए थे। हालांकि मई में साक्षात्कार प्रक्रिया पूरी हो गई थी, लेकिन एसोसिएट प्रोफेसर (एसटी) की नियुक्ति को लेकर विवाद बना रहा। अब संबंधित पक्षों का ध्यान विश्वभारती की प्रतिक्रिया और एनसीएसटी के अगले कदमों पर है।

इस संबंध में विश्वभारती अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

--आईएएनएस

एमएस/

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