
नई दिल्ली. देश में बढ़ते ऑनलाइन गेमिंग के नशे और इससे होने वाले वित्तीय नुकसान पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने 'प्रोमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग रूल्स 2026' को आज, 1 मई 2026 से पूरे देश में प्रभावी कर दिया है। ये नियम उन सभी प्लेटफॉर्म्स के लिए मौत की घंटी हैं जो 'पैसे लगाओ, पैसे जीतो' के मॉडल पर काम कर रहे थे।
नए कानूनों के तहत, अब भारत में किसी भी प्रकार के ऑनलाइन मनी गेम का संचालन करना गैरकानूनी होगा।
हर तरह के मनी गेम बैन: चाहे खेल कौशल (Skill) पर आधारित हो या किस्मत (Chance) पर, यदि उसमें पैसे का दांव लगाया जा रहा है, तो वह प्रतिबंधित है।
विज्ञापनों पर रोक: अब कोई भी सेलिब्रिटी या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर इन गेम्स का प्रमोशन नहीं कर पाएगा। विज्ञापन करने वालों पर भी कड़ी कार्रवाई होगी।
पेमेंट ब्लॉक: बैंकों और डिजिटल वॉलेट्स (UPI/Net Banking) को आदेश दिया गया है कि वे ऐसी प्रतिबंधित गेमिंग साइट्स के लिए किसी भी तरह का ट्रांजैक्शन न करें।
नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए सरकार ने बेहद सख्त सजा तय की है:
जेल और जुर्माना: पहली बार मनी गेम ऑफर करने पर 3 साल की जेल या 1 करोड़ रुपए का जुर्माना हो सकता है। दूसरी बार पकड़े जाने पर यह सजा 5 साल की जेल और 2 करोड़ रुपए तक जा सकती है।
प्रचार करने पर सजा: इन प्रतिबंधित खेलों का विज्ञापन करने पर 2 साल की जेल या 50 लाख रुपए का जुर्माना भुगतना होगा।
आंकड़े बताते हैं कि भारत में करीब 45 करोड़ लोग ऑनलाइन गेमिंग के जाल में फंसे हुए थे। साल 2024 तक यह बाजार 23,200 करोड़ तक पहुंच गया था, लेकिन इसके साथ ही लोगों को 20,000 करोड़ से ज्यादा का वित्तीय नुकसान भी हुआ। कई युवाओं ने कर्ज और हार के दबाव में आकर आत्मघाती कदम उठाए, जिसके बाद सरकार ने ई-स्पोर्ट्स (प्रतिस्पर्धी खेल) को बढ़ावा देने और मनी गेम्स को खत्म करने का फैसला लिया।
जहाँ एक तरफ सट्टेबाजी वाले गेम्स को बैन किया गया है, वहीं सरकार ई-स्पोर्ट्स (E-Sports) और मनोरंजन वाले सोशल गेम्स को बढ़ावा देगी। सरकार का लक्ष्य भारत को एक 'ग्लोबल गेमिंग हब' बनाना है, जहाँ कौशल और मनोरंजन को प्राथमिकता मिले न कि जुए को।
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