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गहरे समुद्र में खनिज और जैव विविधता की खोज में मदद करेगा ‘मत्स्य-6000’, परीक्षण सफल


चेन्नई, 6 नवंबर (आईएएनएस)। भारत की गहरे समुद्र में मानवयुक्त वैज्ञानिक खोज के लिए विकसित पनडुब्बी 'मत्स्य-6000' ने शुक्रवार को तमिलनाडु के कट्टुपल्ली स्थित एलएंडटी शिपयार्ड में अपने मानवरहित परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए। यह उपलब्धि देश की महत्वाकांक्षी 'समुद्रयान परियोजना' के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।

चेन्नई, 6 नवंबर (आईएएनएस)। भारत की गहरे समुद्र में मानवयुक्त वैज्ञानिक खोज के लिए विकसित पनडुब्बी 'मत्स्य-6000' ने शुक्रवार को तमिलनाडु के कट्टुपल्ली स्थित एलएंडटी शिपयार्ड में अपने मानवरहित परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए। यह उपलब्धि देश की महत्वाकांक्षी 'समुद्रयान परियोजना' के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।

मत्स्य-6000 को गहरे समुद्र में वैज्ञानिक अनुसंधान और अन्वेषण के उद्देश्य से विकसित किया गया है। मानवरहित परीक्षणों की सफलता के बाद परियोजना अब अपने अगले चरण की ओर बढ़ेगी, जिससे भारत की समुद्री अनुसंधान क्षमता को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

यह परीक्षण पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमईएस) के सचिव श्रीनिवास कुमार तुम्माला और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी (एनआईओटी) के निदेशक जी. ए. रामदास की उपस्थिति में किया गया।

इस प्रक्रिया के दौरान, एमईएस सचिव ने वाहन की फ्लोटेशन (तैरने की क्षमता), पानी के भीतर स्थिरता, बैलास्ट सिस्टम और विभिन्न उप-घटकों का व्यवस्थित रूप से मूल्यांकन किया। मंत्रालय के अनुसार, 'मत्स्य-6000' ने निर्धारित परीक्षण प्रोटोकॉल के अनुसार सभी मूल्यांकन पूरे किए, जिससे इसके उन्नत परीक्षणों के अगले चरण का रास्ता साफ हो गया है।

एनआईओटी द्वारा डिजाइन और स्वदेशी रूप से विकसित, 'मत्स्य-6000' भारत का चौथी पीढ़ी का मानव युक्त सबमर्सिबल (पानी के नीचे जाने वाला वाहन) है। इसे 2.1 मीटर व्यास वाले गोलाकार ढांचे (हल) में तीन चालक दल के सदस्यों को ले जाने के लिए तैयार किया गया है। 'समुद्रयान परियोजना' के तहत, इस वाहन को 6,000 मीटर तक की गहराई में जाने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे शोधकर्ताओं को गहरे समुद्र में मौजूद खनिज संसाधनों और समुद्री जैव विविधता का पता लगाने में मदद मिलेगी।

इस सबमर्सिबल में कई स्वदेशी प्रणालियां लगी हैं, जिनमें गोता लगाने के लिए मुख्य बैलास्ट सिस्टम, मल्टी-डायरेक्शनल थ्रस्टर्स (विभिन्न दिशाओं में धकेलने वाले उपकरण), बिजली आपूर्ति के लिए ऑनबोर्ड बैटरी बैंक और संरचनात्मक उछाल बनाए रखने के लिए सिंथेटिक फोम शामिल हैं।

इसके अलावा, इस प्लेटफॉर्म में एक अत्याधुनिक पावर डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, उन्नत कंट्रोल हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर, तथा पानी के भीतर नेविगेशन के लिए आधुनिक उपकरण लगे हैं।

सतह और पानी के नीचे संचार के लिए, यह वाहन एकॉस्टिक मॉडेम, अंडरवाटर टेलीफोन और वीएचई रेडियो उपकरणों का उपयोग करता है। इसके साथ ही, इसमें अंडरवाटर एकॉस्टिक पोजिशनिंग सिस्टम और सतह पर जीपीएस ट्रैकिंग की सुविधा भी मौजूद है।

प्रेशर हल (मुख्य ढांचे) के अंदर, मानव जीवन-रक्षक प्रणालियां, पर्यावरण की निगरानी करने वाले डिस्प्ले और नेविगेशन जॉयस्टिक लगाए गए हैं। वाहन के बाहरी हिस्से में तेज रोशनी देने वाली अंडरवाटर लाइटें, कैमरे और समुद्र विज्ञान से जुड़े कई सेंसर लगे हैं।

'मत्स्य-6000' को 2025 में कट्टुपल्ली सुविधा केंद्र ले जाया गया था, जहां इसके 'वेट टेस्ट' (पानी में परीक्षण) किए गए और इसकी कार्यक्षमता का प्रदर्शन किया गया। तब से, इसमें कई नियंत्रित परीक्षण किए गए हैं, जिनमें मानव-युक्त और मानवरहित दोनों तरह के परीक्षण शामिल हैं। इन परीक्षणों में पावर नेटवर्क की मजबूती, वाहन की स्थिरता, मानव सुरक्षा प्रणालियों और वाहन को चलाने की क्षमता (विशेष रूप से आगे और पीछे की ओर गति) पर ध्यान केंद्रित किया गया है। परीक्षण के दौरान नेविगेशन और संचार प्रणालियों की बारीकी से जांच की गई। साथ ही समुद्र विज्ञान से जुड़े कई सेंसर वाले वैज्ञानिक उपकरणों (पेलोड) का भी परीक्षण किया गया।

इसके साथ ही एमईएस (पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय) के सचिव और एनआईओटी (राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान) के निदेशक ने कट्टुपल्ली शिपयार्ड में अनुसंधान पोत 'सागर मंजूषा' की चल रही मरम्मत और नवीनीकरण (ड्राई-डॉक रिपेयर और रिफिट) कार्यों का जायजा लिया।

2006 में बनने के बाद से एनआईओटी द्वारा संचालित, 60 मीटर लंबा यह बहु-विषयक महासागरीय अनुसंधान पोत 11 मीटर चौड़ा है और इसका कुल वजन (ग्रॉस टनेज) 1,065 से 1,075 टन के बीच है। इस जहाज पर 11 वैज्ञानिक, 8 अधिकारी और 10 चालक दल के सदस्य सवार हो सकते हैं। इसमें मौजूद विशेष प्रयोगशालाओं की मदद से यह तटीय और अपतटीय (ऑफशोर) सर्वेक्षण अभियानों में सहायता करता है।

--आईएएनएस

एससीएच/वीसी

Date & Time : 2026-11-06 23:30:05

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