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गंदरबल में लैवेंडर महोत्सव में शामिल हुए सीएम उमर अब्दुल्ला, दुकानदारों के लिए पुनर्वास पैकेज का किया ऐलान


श्रीनगर, 18 जून (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को गंदरबल जिले में आयोजित लैवेंडर महोत्सव में हिस्सा लिया और सड़क चौड़ीकरण परियोजना से प्रभावित दुकानदारों एवं व्यापारियों के लिए पुनर्वास पैकेज देने की घोषणा की।

श्रीनगर, 18 जून (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को गंदरबल जिले में आयोजित लैवेंडर महोत्सव में हिस्सा लिया और सड़क चौड़ीकरण परियोजना से प्रभावित दुकानदारों एवं व्यापारियों के लिए पुनर्वास पैकेज देने की घोषणा की।

उमर अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर विधानसभा में गंदरबल सीट से विधायक भी हैं। उन्होंने गंदरबल के नूनर क्षेत्र स्थित कृषि फार्म में आयोजित लैवेंडर महोत्सव का उद्घाटन किया और किसानों तथा व्यापारियों को संबोधित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश सरकार सड़क चौड़ीकरण परियोजना के कारण अपनी दुकानें और व्यापारिक स्थल खो चुके दुकानदारों के लिए पुनर्वास पैकेज तैयार कर रही है। उन्होंने स्थानीय लोगों को आश्वस्त किया कि सिंचाई संबंधी समस्याओं का भी जल्द समाधान किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महोत्सव क्षेत्र में पुष्पकृषि, मूल्य संवर्धित कृषि और कृषि पर्यटन की अपार संभावनाओं को प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि लैवेंडर की खेती युवाओं के लिए उद्यमिता और आय सृजन का एक अत्यंत लाभकारी माध्यम बनकर उभरी है।

इस प्रदर्शनी का मुख्य विषय "लैवेंडर वैश्विक स्तर पर" रखा गया, जिसका उद्देश्य सुगंधित फसलों के विस्तार और उनके आर्थिक प्रभाव को बढ़ाना है।

जम्मू-कश्मीर में लैवेंडर की खेती, जिसे "पर्पल रिवोल्यूशन" (बैंगनी क्रांति) के नाम से भी जाना जाता है, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद-भारतीय समेकित औषधि संस्थान (सीएसआईआर-आईआईआईएम) के अरोमा मिशन के तहत तेजी से विकसित हो रही कृषि-उद्यम पहल है।

इस पहल ने डोडा, अनंतनाग और गंदरबल सहित कई क्षेत्रों में हजारों ग्रामीण परिवारों की आजीविका में बदलाव लाया है और किसानों को पारंपरिक फसलों के मुकाबले अधिक लाभ देने वाला विकल्प उपलब्ध कराया है।

विशेषज्ञों के अनुसार जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियां लैवेंडर की खेती के लिए बेहद अनुकूल हैं। इस फसल के लिए ठंडी और समशीतोष्ण गर्मियां, सर्द सर्दियां तथा अच्छी जल निकासी वाली हल्की अम्लीय से तटस्थ मिट्टी उपयुक्त होती है।

लैवेंडर की खेती में पारंपरिक फसलों की तुलना में कम पानी की आवश्यकता होती है और यह जंगली जानवरों तथा बंदरों से होने वाले नुकसान के प्रति भी काफी हद तक प्रतिरोधी मानी जाती है।

एक कनाल भूमि (लगभग एक-आठवां एकड़) से सामान्यतः 80 से 90 किलोग्राम ताजे लैवेंडर फूलों का उत्पादन होता है। सूखे फूलों की कीमत आमतौर पर 800 से 1,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक मिलती है।

इन फूलों से आसवन प्रक्रिया के जरिए उच्च गुणवत्ता वाला आवश्यक तेल निकाला जाता है, जिसका उपयोग सौंदर्य प्रसाधन, अरोमा थेरेपी और औषधि उद्योग में व्यापक रूप से किया जाता है।

--आईएएनएस

डीएससी

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