तिरुवनंतपुरम, 25 अगस्त (आईएएनएस)। सीपीआई (एम) और एलडीएफ में उसके दूसरे सबसे बड़े सहयोगी दल सीपीआई के बीच लंबे समय से चल रहे मतभेद अब खुलकर सामने आ गए हैं। मंगलवार को सीपीआई (एम) के वरिष्ठ नेता वी. शिवनकुट्टी ने सीपीआई के असिस्टेंट सेक्रेटरी सत्यम मोकेरी की उस तीखी आलोचना का जवाब दिया, जिसमें उन्होंने विपक्ष के उप नेता के मुद्दे पर विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन की आलोचना की थी।
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तिरुवनंतपुरम, 25 अगस्त (आईएएनएस)। सीपीआई (एम) और एलडीएफ में उसके दूसरे सबसे बड़े सहयोगी दल सीपीआई के बीच लंबे समय से चल रहे मतभेद अब खुलकर सामने आ गए हैं। मंगलवार को सीपीआई (एम) के वरिष्ठ नेता वी. शिवनकुट्टी ने सीपीआई के असिस्टेंट सेक्रेटरी सत्यम मोकेरी की उस तीखी आलोचना का जवाब दिया, जिसमें उन्होंने विपक्ष के उप नेता के मुद्दे पर विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन की आलोचना की थी।
शिवनकुट्टी ने सीपीआई पर राजनीतिक मर्यादा तोड़ने का आरोप लगाया और कहा कि गठबंधन की राजनीति के नियमों के खिलाफ पिनाराई नहीं बल्कि सीपीआई ने काम किया है।
उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण भी बताया कि मंगलवार को सीपीआई के मुखपत्र 'जनयुगम' में मोकेरी की आलोचना छपी थी। उन्होंने कहा कि सीपीआई ऐसी पार्टी की तरह व्यवहार कर रही है जो एलडीएफ को मजबूत नहीं करना चाहती।
विपक्ष के उप नेता के तौर पर सीपीआई (एम) नेता को नामित करने के पिनाराई के फैसले का बचाव करते हुए शिवनकुट्टी ने कहा कि विपक्ष के नेता का कदम लोकतांत्रिक था। यह पद पारंपरिक रूप से सीपीआई (एम) के पास ही रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि इसलिए मौजूदा व्यवस्था को बदलने का कोई कारण नहीं था।
शिवनकुट्टी की यह प्रतिक्रिया मोकेरी द्वारा पिनाराई पर तीखे हमले के बाद आई। मोकेरी ने उन पर गठबंधन के नियमों और गठबंधन में अपेक्षित राजनीतिक नैतिकता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था।
मोकेरी ने तर्क दिया कि उप-नेता का पद एक राजनीतिक मुद्दा है जिस पर विपक्ष के नेता अकेले फैसला नहीं ले सकते, खासकर तब जब सीपीआई और सीपीआई (एम) के बीच राष्ट्रीय नेतृत्व स्तर पर बातचीत चल रही हो।
मोकेरी ने पिनाराई के उस सार्वजनिक दावे पर सवाल उठाया कि वे अकेले ही स्पीकर को उप-नेता का नाम भेजेंगे। उन्होंने पूछा कि जब दोनों पार्टियों के बीच बातचीत में यह मुद्दा उठा ही नहीं था, तो ऐसी एकतरफा घोषणा क्यों की गई।
सीपीआई नेता ने यह भी याद दिलाया कि एलडीएफ संयोजक टीपी रामकृष्णन ने एमएन स्मारक में सीपीआई के राज्य सचिव बिनॉय विश्वम से मुलाकात की थी और इस बात पर सहमति बनी थी कि उप-नेता को लेकर विवाद गठबंधन के कामकाज में बाधा नहीं बनना चाहिए।
इसके बाद पिनाराई की अध्यक्षता में हुई एलडीएफ की बैठक में जल्द होने वाले स्थानीय निकाय उपचुनावों की संयुक्त तैयारियों और गठबंधन के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर सहमति बनी।
मोकेरी ने कम्युनिस्ट नेता जॉर्जी दिमित्रोव के संयुक्त मोर्चा राजनीति के सिद्धांत का हवाला देते हुए तर्क दिया कि गठबंधन एकतरफा फैसलों के बजाय समानता, आपसी सम्मान, विचार-विमर्श और आम सहमति पर आधारित होने चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि वामपंथी राजनीति पर किसी एक नेता की पसंद थोपने की कोशिशें एलडीएफ को कमजोर कर सकती हैं। भाजपा और संघ परिवार को फायदा पहुंचा सकती हैं। यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि इससे एलडीएफ की अगुवाई करने वाली सीपीआई (एम) और उसके दूसरे सबसे बड़े सहयोगी दल सीपीआई के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब विपक्षी गठबंधन चुनावी हार के बाद फिर से एकजुट होने की कोशिश कर रहा है।
तिरुवनंतपुरम जिले में सीपीआई (एम) के प्रमुख नेताओं में से एक और पिनाराई के पूर्व कैबिनेट सहयोगी शिवनकुट्टी खुद नेमोम के पूर्व विधायक हैं। हालिया विधानसभा चुनाव में उन्हें इस सीट पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर से हार का सामना करना पड़ा था।
--आईएएनएस
डीकेएम/पीएम
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