Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

गीता दत्त पुण्यतिथि: जब गुरुदत्त ने आवाज की जादूगरनी को बनाया हीरोइन लेकिन अधूरी रह गई फिल्म


मुंबई, 19 जुलाई (आईएएनएस)। संगीत की दुनिया में गीता दत्त ऐसी एक गायिका थीं, जिनकी आवाज में दर्द भी था, प्यार भी था और जिंदगी के हर रंग की झलक भी मिलती थी। 'बाबूजी धीरे चलना', 'वक्त ने किया क्या हसीं सितम' और 'मेरा सुंदर सपना बीत गया' जैसे गीत आज भी उनकी पहचान हैं। गीता दत्त की कहानी सिर्फ एक महान गायिका की कहानी नहीं है बल्कि एक ऐसी कलाकार की कहानी भी है, जिसे उनके पति और मशहूर फिल्मकार गुरुदत्त बड़े पर्दे पर बतौर अभिनेत्री देखना चाहते थे। हालांकि, यह सपना एक अधूरी फिल्म के साथ हमेशा के लिए अधूरा रह गया।

मुंबई, 19 जुलाई (आईएएनएस)। संगीत की दुनिया में गीता दत्त ऐसी एक गायिका थीं, जिनकी आवाज में दर्द भी था, प्यार भी था और जिंदगी के हर रंग की झलक भी मिलती थी। 'बाबूजी धीरे चलना', 'वक्त ने किया क्या हसीं सितम' और 'मेरा सुंदर सपना बीत गया' जैसे गीत आज भी उनकी पहचान हैं। गीता दत्त की कहानी सिर्फ एक महान गायिका की कहानी नहीं है बल्कि एक ऐसी कलाकार की कहानी भी है, जिसे उनके पति और मशहूर फिल्मकार गुरुदत्त बड़े पर्दे पर बतौर अभिनेत्री देखना चाहते थे। हालांकि, यह सपना एक अधूरी फिल्म के साथ हमेशा के लिए अधूरा रह गया।

गीता दत्त का जन्म 23 नवंबर 1930 को बंगाल के एक जमींदार परिवार में हुआ था। उनका बचपन संगीत के माहौल में बीता। परिवार में वह 10 भाई-बहनों में से एक थीं। बचपन से ही उनका मन पढ़ाई से ज्यादा संगीत में लगता था। उनकी संगीत प्रतिभा को देखते हुए परिवार ने उन्हें संगीत की शिक्षा दिलानी शुरू की।

1942 में उनका परिवार मुंबई आ गया। यहीं से उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया। एक दिन वह घर में रियाज कर रही थीं। उसी दौरान संगीतकार के. हनुमान प्रसाद ने उनकी आवाज सुनी और उनकी प्रतिभा से प्रभावित हो गए। उन्होंने महज 16 साल की उम्र में उन्हें फिल्म 'भक्त प्रह्लाद' में गाने का मौका दिया।

इसके बाद साल 1947 में आई फिल्म 'दो भाई' ने उन्हें पहचान दिलाई। इस फिल्म का गाना 'मेरा सुंदर सपना बीत गया' जबरदस्त लोकप्रिय हुआ और गीता दत्त रातोंरात बड़ी गायिका बन गईं। 1950 के दशक में वह हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय आवाजों में शामिल थीं। उन्होंने एस.डी. बर्मन, ओ.पी. नैय्यर, हेमंत कुमार और कई बड़े संगीतकारों के साथ काम किया। उनकी आवाज में ऐसा जादू था कि वह रोमांटिक, दर्द भरे और चंचल हर तरह के गीत आसानी से गा लेती थीं।

साल 1951 की फिल्म 'बाजी' के दौरान उनकी मुलाकात गुरु दत्त से हुई। इसी फिल्म के दौरान दोनों करीब आए और 1953 में शादी कर ली। शादी के बाद भी गीता दत्त ने अपने गायिका का सफर जारी रखा। उन्होंने गुरु दत्त की फिल्मों 'आर-पार', 'सीआईडी', 'प्यासा', 'कागज के फूल' और 'साहिब बीबी और गुलाम' के लिए कई यादगार गीत गाए।

लेकिन गुरु दत्त सिर्फ उनकी आवाज के दीवाने नहीं थे। वह गीता की अभिनय क्षमता को भी पहचानते थे। गुरु दत्त चाहते थे कि गीता सिर्फ प्लेबैक सिंगर बनकर न रहें बल्कि खुद पर्दे पर भी अपनी पहचान बनाएं। इसी सोच के साथ उन्होंने साल 1957 में फिल्म 'गौरी' शुरू की। यह गीता दत्त की बतौर अभिनेत्री पहली बड़ी फिल्म होती। फिल्म की शूटिंग कोलकाता में शुरू हुई थी और इसे हिंदी के साथ बंगाली और अंग्रेजी भाषा में बनाने की योजना थी।

'गौरी' गीता दत्त के लिए बेहद खास प्रोजेक्ट था, लेकिन शूटिंग शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद फिल्म का काम रुक गया। इसके बंद होने की वजह को लेकर कई तरह की बातें सामने आईं, लेकिन फिल्म दोबारा शुरू नहीं हो सकी। इस तरह गीता दत्त का अभिनेत्री बनने का सपना अधूरा रह गया।

इसके बाद धीरे-धीरे उनके निजी जीवन की परेशानियों का असर उनके करियर पर भी पड़ा। गुरु दत्त के साथ रिश्तों में आई दूरियों और निजी संघर्षों के बीच उनकी गायकी पहले जैसी नहीं रह पाई। हालांकि, उन्होंने 1971 में फिल्म 'अनुभव' के लिए 'मुझे जान न कहो मेरी जान', 'कोई चुपके से आके' और 'मेरा दिल जो मेरा होता' जैसे शानदार गीत गाए।

अपने लंबे करियर में गीता दत्त ने 1400 से ज्यादा गीत गाए। उनके सम्मान में भारत सरकार ने उनके नाम पर डाक टिकट भी जारी किए। 20 जुलाई 1972 को महज 41 साल की उम्र में गीता दत्त का निधन हो गया लेकिन उनकी आवाज आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में जिंदा है।

--आईएएनएस

पीके/पीएम

Share:

Leave A Reviews

Related News