
नई दिल्ली. इस समय सोने और चांदी की कीमतें भारी गिरावट का अनुभव कर रही हैं, जो पिछले 12 वर्षों में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है. मंगलवार को शुरू हुई बिकवाली बुधवार तक जारी रही, जिसमें ₹3700 तक की गिरावट देखने को मिली.
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट मुख्य रूप से निवेशकों द्वारा किए गए मुनाफावसूली का परिणाम है, जिन्होंने ऊंचे स्तर पर अपनी संख्या पूरी कर ली थी. केसीएम ट्रेड के मुख्य विश्लेषक टिम वॉटरर के अनुसार, यह प्रक्रिया एक स्नोबॉल की तरह तेजी से बढ़ती गई.
आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को सोने की कीमतें 6.3 प्रतिशत से अधिक गिरकर 4,004.26 डॉलर प्रति औंस पर आ गईं. वहीं, चांदी भी 7.1 प्रतिशत लुढ़ककर 47.6 डॉलर के करीब पहुंच गई. भारत में, सोने की कीमतें 12,000 रुपये प्रति ग्राम से ऊपर थीं, लेकिन अब यह गिरावट के साथ 12,000 रुपये प्रति ग्राम के नीचे आ गई.
गंभीर गिरावट के बावजूद बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि यह केवल एक करेक्शन (सुधार) है, जो बड़ी तेजी के बाद सामान्य है. उन्होंने कहा कि वैश्विक ब्याज दरें, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और मौद्रिक नीति में ढील के कारण सोने की कीमतें पहले भी तेजी से बढ़ीं थीं.
इन सबके बीच, विशेषज्ञों का सुझाव है कि निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और बाजार की स्थिति का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करना चाहिए.
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