
नई दिल्ली. केंद्र सरकार देश में शासन व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं को अधिक आसान, समावेशी और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। डिजिटल इंडिया ‘भाषिणी’ डिवीजन (DIBD) और नीति आयोग ने ‘भाषिणी फॉर सेवा/संचालन’ पहल के तहत एक महत्वपूर्ण आशय पत्र (SoI) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य मल्टीलिंगुअल (बहुभाषी) और वॉयस-फर्स्ट एआई (Voice-First AI) तकनीक का उपयोग करके सरकारी सेवाओं की पहुंच देश के अंतिम व्यक्ति तक उसकी अपनी मातृभाषा में सुनिश्चित करना है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, इस साझेदारी के जरिए नीति आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म, डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सिस्टम और संचार वर्कफ्लो में 'भाषिणी' के एआई-आधारित अनुवाद एपीआई (Language Translation API) और रेफरेंस एप्लीकेशन को एकीकृत किया जाएगा। इससे नागरिक अपनी-अपनी पसंदीदा भारतीय भाषाओं में सरकारी योजनाओं, नीतियों और सेवाओं की सटीक जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे।
इस बहुभाषी एआई इकोसिस्टम में दो प्रमुख तकनीकी उपकरण अहम भूमिका निभाएंगे:
'स्मृति' (SMRITI): इसका पूरा नाम सिस्टम फॉर मीटिंग रिकॉर्डिंग, इनफॉर्मेशन एंड ट्रांसक्रिप्शन इंटरफेस है। यह टूल सरकारी बैठकों के मिनट्स (Minutes of Meeting) को स्वचालित (Auto-generate) रूप से तैयार करेगा और उनका अलग-अलग भाषाओं में अनुवाद भी करेगा, जिससे सरकारी कामकाज में तेजी और पारदर्शिता आएगी।
'नीति तारा' (NITI TARA): टूलकिट फॉर एनालिसिस, रिव्यू एंड एक्शन के माध्यम से डेटा को जमीनी स्तर पर प्रशासनिक फैसलों में बदला जा रहा है। साक्ष्य-आधारित निर्णय (Data-driven Decisions) लेने के लिए देश भर के जिलों और ब्लॉकों में 4,000 से अधिक अधिकारियों को 200 से अधिक क्षमता निर्माण सत्रों के जरिए प्रशिक्षित भी किया जा चुका है।
इस पहल के तहत विभिन्न क्षेत्रों के लिए वॉयस बॉट (Voice Bots) विकसित किए जाएंगे, जिससे पढ़े-लिखे या डिजिटल तकनीक से कम परिचित लोग भी बोलकर सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। इसके साथ ही 'भाषिणी सहयोगी' के माध्यम से 'भाषादान' अभियान चलाया जाएगा, जिसमें नीति आयोग के अधिकारियों और आम नागरिकों से टेक्स्ट, ऑडियो और वीडियो सैंपल देने का आग्रह किया जाएगा ताकि भारतीय भाषाओं के एआई मॉडल को और अधिक सटीक व समृद्ध बनाया जा सके।
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