गांधीनगर, 9 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 मई को 'सोमनाथ अमृत पर्व' के मौके पर पहले ज्योतिर्लिंग सोमनाथ के प्रांगण में आने वाले हैं। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने प्रधानमंत्री के रोड शो वाले मार्ग समेत अन्य रूट का पैदल निरीक्षण किया। साथ ही सागर दर्शन में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की।
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गांधीनगर, 9 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 मई को 'सोमनाथ अमृत पर्व' के मौके पर पहले ज्योतिर्लिंग सोमनाथ के प्रांगण में आने वाले हैं। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने प्रधानमंत्री के रोड शो वाले मार्ग समेत अन्य रूट का पैदल निरीक्षण किया। साथ ही सागर दर्शन में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की।
समीक्षा बैठक में उपमुख्यमंत्री ने पीएम मोदी के आने-जाने के रूट, मीटिंग की जगह और रोड शो की जगह, पार्किंग और ट्रैफिक कंट्रोल और स्वास्थ्य सुविधा के इंतजामों पर विस्तार से अधिकारियों के साथ चर्चा की। उपमुख्यमंत्री ने अलग-अलग विभागों के अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियों समेत जरूरी निर्देश दिए और हर विभाग के कोऑर्डिनेशन से कार्यक्रम को आसानी से आयोजित करने की दिशा में काम करने को कहा।
बैठक से पहले उपमुख्यमंत्री संघवी ने हेलीपैड से लेकर हमीरजी गोहिल सर्किल तक रोड शो और पूरे मंदिर कॉम्प्लेक्स के लिए बनाए गए रूट का निरीक्षण किया। रोड शो के रूट पर सिक्योरिटी और यातायात व्यवस्था के साथ-साथ रोड सुविधा को भी देखा और बैरिकेडिंग समेत व्यवस्था के बारे में संबंधित अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए। गर्मी का मौसम होने की वजह से प्रधानमंत्री के रोड शो और मीटिंग की जगह पर लोगों को गर्मी से बचाने के लिए स्प्रिंकलर और पानी-छाछ समेत अन्य व्यवस्था करने का सुझाव दिया।
समीक्षा बैठक में कृषि मंत्री जीतूभाई वघानी, शिक्षा मंत्री डॉ. प्रद्युम्नभाई वाजा, वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुनभाई मोढवाडिया, ऊर्जा राज्य मंत्री कौशिकभाई वेकारिया, सांसद राजेशभाई चूड़ासमा, विधायक सर्वश्री भगवानभाई बराड, अनिरुद्धभाई दवे और प्रिंसिपल सेक्रेटरी अश्विनी कुमार समेत अधिकारी मौजूद रहे।
'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के जरिए इस वर्ष मंदिर पर हुए पहले हमले के 1,000 साल और इसके पुनर्निर्माण के बाद दोबारा उद्घाटन के 75 वर्ष पूरे होने का विशेष आयोजन किया जा रहा है। इसी अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 मई को सोमनाथ मंदिर पहुंचेंगे।
गुजरात के सौराष्ट्र तट पर प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला और सबसे पवित्र माना जाता है। शिव पुराण में वर्णित यह मंदिर भगवान शिव, भगवान कृष्ण और शक्ति की उपासना का प्रमुख केंद्र है। द्वादश ज्योतिर्लिंग में भी सोमनाथ को सबसे पहला स्थान दिया गया है, जो भारतीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत में इसकी सर्वोच्च पहचान को दर्शाता है।
सोमनाथ मंदिर का इतिहास संघर्ष और पुनर्निर्माण की अद्भुत गाथा है। वर्ष 1026 में इस मंदिर पर पहला बड़ा हमला हुआ था। इसके बाद 11वीं से 18वीं शताब्दी तक कई बार मंदिर को तोड़ा गया और लूटा गया, लेकिन हर बार भक्तों और राजाओं ने इसे फिर से खड़ा किया। 12वीं शताब्दी में राजा कुमारपाल ने मंदिर का पुनर्निर्माण कराया। इसके बाद जूनागढ़ के राजा और फिर इंदौर की मराठा महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने भी सोमनाथ मंदिर को नई पहचान दी।
स्वतंत्रता के बाद लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1947 में सोमनाथ के खंडहरों का दौरा किया और इसके पुनर्निर्माण का संकल्प लिया। उनका मानना था कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण भारत के सांस्कृतिक आत्मविश्वास को फिर से मजबूत करेगा। इसके बाद जनभागीदारी और राष्ट्रीय संकल्प के साथ वर्तमान मंदिर का निर्माण कैलाश महामेरु प्रसाद वास्तुकला में किया गया।
11 मई 1951 को भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर का पुनः उद्घाटन किया। आज 75 साल बाद भी सोमनाथ भारत की आस्था, गौरव और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक बना हुआ है।
--आईएएनएस
ओपी/वीसी
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