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गुजरात की दुग्ध संजीवनी योजना का अध्ययन करेंगे मध्य प्रदेश के अधिकारी


भोपाल, 24 जून (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में संचालित मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना के हितग्राहियों को ज्यादा लाभ हो इस मकसद से राज्य के अधिकारी गुजरात की दुग्ध संजीवनी योजना के अध्ययन के लिए बनासकांठा जाएंगे। राज्यपाल मंगु भाई पटेल ने अधिकारियों को भेजने के निर्देश दिए हैं।

भोपाल, 24 जून (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में संचालित मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना के हितग्राहियों को ज्यादा लाभ हो इस मकसद से राज्य के अधिकारी गुजरात की दुग्ध संजीवनी योजना के अध्ययन के लिए बनासकांठा जाएंगे। राज्यपाल मंगु भाई पटेल ने अधिकारियों को भेजने के निर्देश दिए हैं।

राज्यपाल पटेल ने बुधवार को लोक भवन में आयोजित पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अधिकारियों से चर्चा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना के हितग्राहियों को दुग्ध संग्रहण एवं विपणन की मजबूत व्यवस्था उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाए।

उन्होंने कहा कि हितग्राही को उत्पादित दुग्ध का उचित मूल्य दिलाने के लिए परिवहन व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। विभागीय अथवा थर्ड पार्टी समन्वय से आवश्यक वाहनों की उपलब्धता पर विचार किया जाए।

राज्यपाल पटेल ने कहा है कि मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना अति-गरीब के पोषण और सतत् आजीविका की पहल है। योजना की सफलता के लिए अति-गरीब को प्राथमिकता वितरण पद्धति का आधार होना चाहिए। उन्होंने अति-पिछड़ी जनजातियों बैगा, भारिया और सहरिया के अति-गरीब को प्राथमिकता से लाभान्वित करने के प्रयासों पर बल दिया।

राज्यपाल ने कहा कि पशु वितरण कार्यक्रम में लाभान्वित महिला हितग्राहियों के माध्यम से पशुपालन व्यवस्थाओं और परिवार की आय में बढ़ोतरी के संबंध में जानकारी प्रदान करने की पहल करें। उन्‍होंने गुजरात राज्य में जनजातीय बहुल क्षेत्र में दुग्ध संजीवनी योजना के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पशु प्रदाय योजना के हितग्राहियों को परिवार के बच्चों के लिए दुग्ध की उपलब्धता को सुनिश्चित करने की समझाइश दी जाए।

विभाग के द्वारा 2 महिला, 2 पुरुष अधिकारियों को बनासकांठा के डेयरी उद्योग का अध्ययन करने के लिए गुजरात राज्य भेजने के निर्देश दिए हैं।

राज्यपाल पटेल को प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी उमाकांत उमराव ने बताया कि प्रदेश के किसानों, पशुपालकों को मोबाइल पर ही पशुओं के पोषण संबंधी जानकारी दी जा रही है। साथ ही वैज्ञानिक तरीके से पशुओं को आहार मिले, इसके लिए विभाग द्वारा गोरस मोबाइल ऐप तैयार कराया गया है। यह ऐप पूरी तरह से सरल हिंदी भाषा में विकसित किया है। इसके लिए नेट की भी आवश्यकता नहीं है।

--आईएएनएस

एसएनपी/डीकेपी

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