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गुरु हनुमान: भारतीय कुश्ती को दिया आधुनिक रूप, सुशील कुमार और रवि दहिया के गुरु सतपाल सिंह को दिया था प्रशिक्षण

नई दिल्ली, 14 मार्च (आईएएनएस)। कुश्ती भारत का एक पारंपरिक खेल है। समय-समय पर ऐसे-ऐसे पहलवान देश में जन्म लेते रहे हैं जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से भारतीय कुश्ती को बुलंदी पर पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है। गुरु हनुमान के नाम से मशहूर विजय पाल यादव का नाम भी ऐसे पहलवानों में प्रमुखता से लिया जाता है।

नई दिल्ली, 14 मार्च (आईएएनएस)। कुश्ती भारत का एक पारंपरिक खेल है। समय-समय पर ऐसे-ऐसे पहलवान देश में जन्म लेते रहे हैं जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से भारतीय कुश्ती को बुलंदी पर पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है। गुरु हनुमान के नाम से मशहूर विजय पाल यादव का नाम भी ऐसे पहलवानों में प्रमुखता से लिया जाता है।

विजय पाल यादव का जन्म 15 मार्च 1901 को चिड़ावा, राजस्थान में हुआ था। वह कभी स्कूल नहीं गए, लेकिन बेहद कम उम्र से कुश्ती को लेकर उनके मन में जुनून था। कुश्ती में वह कुछ बड़ा करने का सपना देखते थे। इसलिए, कम उम्र से ही अखाड़े में कुश्ती लड़ने लगे थे। 1919 में सब्जी मूंदी में बिड़ला मिल्स के पास एक दुकान खोलने के लिए दिल्ली आए थे, लेकिन मन तो कुश्ती में रमा था। दुकानदारी की जगह पहलवानी में उन्होंने समय दिया और जल्द ही क्षेत्र में मशहूर हो गए।

एक पहलवान और एक कोच के तौर पर, गुरु हनुमान ने पारंपरिक भारतीय कुश्ती स्टाइल, पहलवानी को अंतरराष्ट्रीय कुश्ती के मानकों के मुताबिक बनाया और उसे आधुनिक कुश्ती का रूप दिया। समय के साथ उन्होंने भारत के लगभग सभी फ्रीस्टाइल अंतरराष्ट्रीय पहलवानों को कोचिंग दी। उनके शिष्यों सुदेश कुमार और प्रेम नाथ ने 1958 में कार्डिफ कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीते थे। सतपाल और करतार सिंह ने क्रमशः 1982 और 1986 में एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीते। उनके आठ शिष्यों को भारत का सबसे बड़ा खेल सम्मान अर्जुन अवॉर्ड मिला मिल चुका है। गुरु हनुमान शाकाहारी खाने को ज्यादा प्राथमिकता देते थे।

24 मई 1999 को हरिद्वार जाते समय मेरठ के पास एक कार दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई। उन्हें 1987 में प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य पुरस्कार और 1983 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। 9 अगस्त 2003 को, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना ने नई दिल्ली के कल्याण विहार स्पोर्ट्स स्टेडियम में गुरु हनुमान की एक मूर्ति का अनावरण किया।

भारतीय उद्योगपति के. के. बिड़ला ने उन्हें मलकागंज, सब्जी मंडी (पुरानी दिल्ली) में अखाड़ा खोलने के लिए ज़मीन दी, इस तरह 1925 के आसपास 'बिड़ला मिल्स व्यायामशाला' शुरू हुई, जिसे दिल्ली के कमला नगर में बिड़ला मिल्स मैनेज कर रहा था, जिसे बाद में गुरु हनुमान अखाड़ा के नाम से जाना गया। गुरु हनुमान अखाड़ा पारंपरिक हिंदी बोली में पहलवानों का ट्रेनिंग सेंटर या अखाड़ा है।

1925 में नॉर्थ दिल्ली में रोशनआरा बाग के पास शक्ति नगर में शुरू हुआ यह अखाड़ा भारत का सबसे पुराना मौजूदा कुश्ती स्कूल है। इस अखाड़े से दारा सिंह, हंस राम, गुरु सतपाल, उद्दल सिंह, सुभाष वर्मा, वीरेंद्र सिंह, सुशील कुमार, योगेंद्र कुमार, विशाल त्रिखा, अनुज चौधरी, राजीव तोमर, अनिल मान, सुजीत मान, चांद खत्री, नवीन, और राकेश गूंगा जैसे पहलवान निकले हैं। इस अखाड़े की जमीन को पहलवान काफी शुभ मानते हैं। 2014 में, कुश्ती अकादमी को भारत सरकार ने 2014 के राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार के लिए चुना था।

गुरु हनुमान के शिष्य सतपाल सिंह मौजूदा समय के बड़े कुश्ती कोच हैं। उनके शिष्यों में सुशील कुमार और रवि दहिया जैसे बड़े नाम हैं, जिन्होंने ओलंपिक में देश के लिए पदक जीता है।

--आईएएनएस

पीएके

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