
ग्वालियर. मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापमं घोटाले की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि ग्वालियर के गजरा राजा मेडिकल कॉलेज (GRMC) में एक और बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। आरोप है कि कॉलेज के बाबू और विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने मिलीभगत कर उन छात्रों को एमबीबीएस की डिग्री थमा दी, जिन्हें व्यापमं कांड में शामिल होने के कारण बर्खास्त कर दिया गया था।
शिकायत के अनुसार, छात्र शाखा (UG) के प्रभारी प्रशांत चतुर्वेदी और उनके सहायक पंकज कुशवाह ने नियमों को ताक पर रखकर उन छात्रों को डिग्री जारी की, जो न तो बहाल हुए थे, न ही जिनकी उपस्थिति (Attendance) पूरी थी और न ही जिन्होंने अंतिम परीक्षा दी थी। आरोप है कि इसके लिए प्रति छात्र 16 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि वसूली गई।
इस पूरे खेल का खुलासा एक कथित ऑडियो क्लिप से हुआ है। इसमें यूजी शाखा प्रभारी प्रशांत चतुर्वेदी को एक बर्खास्त छात्र को सफाई देते सुना जा सकता है। शिकायतकर्ता संदीप लहारिया, जो स्वयं व्यापमं मामले में बर्खास्त छात्र रहे हैं, ने यह ऑडियो राज्यपाल और मेडिकल कॉलेज के डीन को सौंपते हुए जांच की मांग की है। उनका दावा है कि बर्खास्तगी के बाद भी करीब 30 से अधिक छात्रों को गलत तरीके से डिग्रियां बांटी गई हैं।
इस मामले में जीवाजी विश्वविद्यालय की गोपनीय शाखा की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। जब मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. आर.के.एस. धाकड़ से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने पहले अनभिज्ञता जताई, लेकिन सूत्रों के अनुसार उन्होंने मामले की जांच डॉ. प्रमोद कुमार छाबनिया को सौंप दी है।
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