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ग्वालियर में मदरसा दारुल उल कुरान पर संयुक्त टीम का छापा, 22 बच्चों को किया रेस्क्यू, व्यवस्थाओं की जांच शुरू


ग्वालियर शहर अंतर्गत एजी ऑफिस के समीप स्थित मदरसा दारुल उल कुरान पर शनिवार को राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, बाल कल्याण समिति (CWC), महिला एवं बाल विकास विभाग, स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने औचक छापामार कार्रवाई की। इस सघन अभियान के दौरान मदरसे से कुल 22 बच्चों को रेस्क्यू किया गया, जिनमें 7 नाबालिग बच्चियां और 15 बालक शामिल हैं।

जांच दल ने मदरसे के कमरों, आवासीय व्यवस्था, खान-पान, साफ-सफाई और शिक्षण सुविधाओं का मौके पर निरीक्षण किया। बाल आयोग एवं प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, निरीक्षण के दौरान बच्चों के रख-रखाव, सुरक्षा और रहने की बुनियादी सुविधाओं में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। अधिकारियों ने आरोप लगाया कि मदरसे में बच्चों को निर्धारित मानकों और बाल संरक्षण नियमों के अनुरूप नहीं रखा जा रहा था। बाल कल्याण समिति ने रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों को अपनी देखरेख में लेते हुए सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया है।

राजस्थान और चंबल अंचल के मिले बच्चे, प्रबंधन ने मानी कमियां

पड़ताल के दौरान सामने आया कि मदरसे में रह रहे बच्चे केवल ग्वालियर-चंबल अंचल के ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य राजस्थान के विभिन्न जिलों से भी लाए गए थे। प्रशासन ने सभी बच्चों के व्यक्तिगत विवरण और आधारभूत दस्तावेज जुटाकर उनके परिजनों से टेलीफोनिक संपर्क साधना शुरू कर दिया है।

कार्रवाई के दौरान मदरसे के शिक्षक मोहम्मद साकिर ने स्वीकार किया कि कुछ व्यवस्थागत कमियां हो सकती हैं और यदि ऐसा है तो उन्हें दुरुस्त कर लिया जाएगा। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि सभी बच्चे अपने माता-पिता की पूर्ण सहमति से यहां रहकर धार्मिक व बुनियादी तालीम ले रहे थे। वहीं, कार्रवाई की सूचना मिलने के बाद कई अभिभावकों ने चिंता जताई और कहा कि उनके बच्चे सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई कर रहे थे; उन्होंने प्रशासन से बच्चों की सुरक्षा और वर्तमान स्थिति की स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है।

बाल आयोग ने दिए सख्त जांच के आदेश, दस्तावेजों का सत्यापन जारी

बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य/अध्यक्ष निवेदिता शर्मा ने स्पष्ट किया कि बच्चों के मूल अधिकारों, मानसिक व शारीरिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह संयुक्त कार्रवाई की गई है। आयोग इस बात की गहनता से पड़ताल कर रहा है कि बच्चों को किन परिस्थितियों में वहां रखा जा रहा था, संस्था के पास आवासीय केंद्र चलाने की वैध वैधानिक अनुमतियां हैं या नहीं, और क्या जेजे एक्ट (किशोर न्याय अधिनियम) के नियमों का उल्लंघन हुआ है।

फिलहाल प्रशासनिक और विभागीय टीम मदरसे के पंजीयन, बच्चों के प्रवेश संबंधी रिकॉर्ड, अभिभावकों के सहमति पत्रों और वित्तीय स्रोतों की जांच कर रही है। बाल कल्याण समिति द्वारा बच्चों की काउंसलिंग कराई जा रही है, जिसके बाद परिजनों की उपस्थिति में अग्रिम कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

Date & Time : 2026-10-24 12:55:40

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