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हैदराबाद: मेडिकल कॉलेज में रैगिंग करने के आरोप में 12 छात्रों पर मुकदमा दर्ज


हैदराबाद, 17 जून (आईएएनएस)। हैदराबाद पुलिस ने सरकारी डेंटल कॉलेज के 12 छात्रों पर रैगिंग करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि उस्मानिया मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर में बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (बीडीएस) के प्रथम वर्ष के छात्रों को सीनियर छात्रों ने परेशान किया था।

हैदराबाद, 17 जून (आईएएनएस)। हैदराबाद पुलिस ने सरकारी डेंटल कॉलेज के 12 छात्रों पर रैगिंग करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि उस्मानिया मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर में बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (बीडीएस) के प्रथम वर्ष के छात्रों को सीनियर छात्रों ने परेशान किया था।

जानकारी सामने आई कि डेंटल कॉलेज के छात्र अभी उस्मानिया मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में रह रहे हैं, जहां रैगिंग की यह कथित घटना हुई। घटना को गंभीरता से लेते हुए कॉलेज प्रशासन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की और आगे की जांच पूरी होने तक फाइनल-ईयर के छह बीडीएस छात्रों को छह महीने के लिए सस्पेंड कर दिया। आरोप है कि उन्होंने अपने जूनियर्स को शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान किया।

इसके अलावा, कॉलेज के प्रिंसिपल संजीव सिंह यादव ने पुलिस में भी शिकायत दी। शिकायत के बाद तेलंगाना रैगिंग निषेध अधिनियम के तहत सुल्तान बाजार थाने में फाइनल-ईयर के 12 छात्रों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने घटना में शामिल छात्रों को समझाया और आगे की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि वे यह पता लगा रहे हैं कि क्या रैगिंग की घटना में और भी छात्र शामिल थे।

अधिकारियों ने बताया कि कॉलेज में ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए एंटी-रैगिंग कमेटी को और मजबूत किया गया है।

प्रिंसिपल ने चेतावनी दी है कि रैगिंग में शामिल किसी भी छात्र को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे, जिसमें कॉलेज से हमेशा के लिए निकाला जाना और सख्त कानूनी सजा शामिल है, जिससे उनका भविष्य बर्बाद हो सकता है। उन्होंने जूनियर छात्रों को सलाह दी कि वे डरें नहीं और अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें।

1997 में, अविभाजित आंध्र प्रदेश राज्य ने शैक्षणिक संस्थानों के अंदर और बाहर रैगिंग की प्रथा पर रोक लगाने के लिए 'आंध्र प्रदेश रैगिंग निषेध अधिनियम' लागू किया था।

अगर छात्र इस अधिनियम के तहत किसी अपराध का दोषी पाया जाता है और उसे जेल की सजा होती है, तो उसे शैक्षणिक संस्थान से निकाल दिया जाएगा। अगर किसी छात्र को दोषी ठहराया जाता है और छह महीने से अधिक की सजा होती है, तो उसे राज्य के किसी भी अन्य शैक्षणिक संस्थान में दाखिला नहीं मिलेगा।

इस अधिनियम में यह भी प्रावधान है कि रैगिंग में शामिल छात्र के मार्क्स कार्ड और अन्य शैक्षणिक प्रमाणपत्रों पर मोटे अक्षरों में यह दर्ज किया जाएगा कि वह रैगिंग में शामिल था।

--आईएएनएस

डीसीएच/

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