
नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने सरकारी जमीनों और परिसरों पर अवैध कब्जे की समस्या से निपटने के लिए सख्त रुख अपनाया है। वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद द्वारा लोकसभा में पेश किए गए जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत अब अवैध कब्जा करने वालों पर भारी वित्तीय दंड लगाया जाएगा। नए प्रस्ताव के अनुसार, अवैध कब्जे के पहले महीने में संबंधित संपत्ति के लाइसेंस शुल्क का 40 गुना जुर्माना वसूला जाएगा। इतना ही नहीं, यदि कब्जा जारी रहता है, तो जुर्माने की यह राशि हर महीने 10 प्रतिशत की दर से बढ़ती जाएगी।
गैर-आवासीय सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करने वालों के लिए विधेयक में कठोर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। इसमें 6 महीने तक की जेल, संपत्ति के मूल्य का 5 प्रतिशत वार्षिक जुर्माना, या दोनों सजाएं एक साथ दी जा सकती हैं। प्रशासनिक प्रक्रिया को गति देने के लिए मजिस्ट्रेट को अब 'त्वरित बेदखली' (Fast-track Eviction) का आदेश देने का अधिकार भी दिया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य कानूनी पेचीदगियों को कम करना और सरकारी संपत्तियों को जल्द से जल्द मुक्त कराना है।
एक ओर जहां अवैध कब्जे पर सख्ती दिखाई गई है, वहीं दूसरी ओर मोटर वाहन अधिनियम में 20 संशोधनों के जरिए आम जनता को राहत देने का प्रयास किया गया है। अब वाहन मालिक अपने पूरे राज्य में कहीं भी वाहन का पंजीकरण (Registration) करा सकेंगे, जिससे क्षेत्रीय सीमाओं की बाध्यता खत्म होगी। इसके अलावा, ड्राइविंग लाइसेंस की अवधि समाप्त होने के बाद 30 दिनों की ग्रेस पीरियड (छूट अवधि) मिलेगी। साथ ही, वाहन पंजीकरण रद्द करने की सूचना देने की समय सीमा को भी बढ़ाकर 30 दिन करने का प्रस्ताव है, जिससे कागजी कार्यवाही में लचीलापन आएगा।
इस विधेयक का व्यापक उद्देश्य न केवल दंड को प्रभावी बनाना है, बल्कि 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और 'ईज ऑफ लिविंग' को बढ़ावा देना भी है। नियमों को सरल बनाकर सरकार अनावश्यक कानूनी बोझ को कम करना चाहती है। प्रस्तावित बदलावों से न केवल प्रशासनिक कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है, बल्कि यह आम नागरिकों और व्यापारियों के लिए नियमों के अनुपालन को अधिक सरल और पारदर्शी बनाएगा।
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