Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

'ईमानदारी' से भरे किरदारों का जादूगर: दिलीप कुमार के 'फैन' का मैच देखते वक्त हुआ था निधन

नई दिल्ली, 12 मार्च (आईएएनएस)। सिनेमा में लीड एक्टर जितने महत्वपूर्ण होते हैं, उतने ही को-एक्टर भी। वे फिल्म को गहराई देते हैं, कहानी को मजबूत बनाते हैं और दर्शकों के दिलों में अपनी अलग पहचान छोड़ जाते हैं। ऐसे ही एक शानदार को-एक्टर थे शफी इनामदार। उन्होंने हर किरदार को पूरी ईमानदारी, संवेदनशीलता और कुशलता से निभाया। चाहे थिएटर हो, फिल्म या टीवी, शफी ने हमेशा अपनी अदाकारी से दर्शकों को प्रभावित किया। उनके किरदारों में जो सच्चाई और गहराई थी, वह उन्हें दर्शकों का प्रिय बनाती थी।

नई दिल्ली, 12 मार्च (आईएएनएस)। सिनेमा में लीड एक्टर जितने महत्वपूर्ण होते हैं, उतने ही को-एक्टर भी। वे फिल्म को गहराई देते हैं, कहानी को मजबूत बनाते हैं और दर्शकों के दिलों में अपनी अलग पहचान छोड़ जाते हैं। ऐसे ही एक शानदार को-एक्टर थे शफी इनामदार। उन्होंने हर किरदार को पूरी ईमानदारी, संवेदनशीलता और कुशलता से निभाया। चाहे थिएटर हो, फिल्म या टीवी, शफी ने हमेशा अपनी अदाकारी से दर्शकों को प्रभावित किया। उनके किरदारों में जो सच्चाई और गहराई थी, वह उन्हें दर्शकों का प्रिय बनाती थी।

सिनेमा और थिएटर के मशहूर चरित्र अभिनेता शफी इनामदार की 13 मार्च को पुण्यतिथि है। शफी इनामदार दिलीप कुमार के जबरदस्त प्रशंसक थे और उन्हें इस बात की बहुत खुशी थी कि उन्होंने दिलीप साहब के साथ ‘इज्जतदार’ फिल्म में काम किया था। शफी इनामदार की एक्टिंग में ईमानदारी और गहराई थी। उनके किरदार दर्शकों को अपनी तकलीफ भुला देते थे। थिएटर से लेकर फिल्म और टीवी तक, उन्होंने हर माध्यम में अपनी छाप छोड़ी। आज भी उनके किरदारों की यादें लोगों के दिलों में जिंदा हैं।

शफी इनामदार का जन्म 23 अक्टूबर 1945 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी में हुआ था। उन्होंने मुंबई के केसी कॉलेज से पढ़ाई पूरी की। बचपन से ही एक्टिंग का शौक था, लिहाजा, स्कूल-कॉलेज के दिनों से ही नाटकों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। इसी वजह से उनकी एक्टिंग की नींव बहुत मजबूत हो गई। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत गुजराती थिएटर की मशहूर हस्ती प्रवीण जोशी के मार्गदर्शन में की। बाद में बलराज साहनी से मुलाकात हुई और उन्होंने आईपीटीए, यानी इंडियन पीपल्स थिएटर एसोसिएशन, ज्वाइन की।

शफी कहते थे कि उनकी एक्टिंग और डायरेक्शन में असली निखार तब आया जब वे बलराज साहनी के संपर्क में आए। 70 के दशक में उन्होंने पृथ्वी थिएटर्स ज्वाइन किया। यहां कई बड़े नाटक प्रोड्यूस और डायरेक्ट किए। पृथ्वीराज कपूर के बाद पृथ्वी थिएटर को उनके छोटे बेटे शशि कपूर ने संभाला। शशि कपूर शफी की एक्टिंग से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उन्हें अपनी फिल्म ‘विजेता’ में काम करने के लिए साइन कर लिया। साल 1982 में आई फिल्म के डायरेक्टर गोविंद निहलानी थे। उसी दौर में गोविंद निहलानी ने ‘अर्धसत्य’ में भी उन्हें महत्वपूर्ण भूमिका दी, जो दर्शकों को बहुत पसंद आई।

शफी इनामदार का मानना था कि एक्टिंग उनकी जिंदगी है। वे यह नहीं देखते थे कि काम थिएटर में है, फिल्म में है या टीवी पर। 1984 में टीवी पर उनका सीरियल ‘ये जो है जिंदगी’ बहुत हिट हुआ, जिसमें स्वरूप संपत उनके साथ थीं। 80 के दशक में बीआर चोपड़ा की कई फिल्मों में उन्होंने काम किया, जो लोगों के दिलों में बस गईं।

अभिनय से आगे बढ़कर साल 1995 में शफी डायरेक्टर बने। उनकी पहली फिल्म ‘हम दोनों’ थी, जिसमें नाना पाटेकर और ऋषि कपूर मुख्य भूमिकाओं में थे। शफी ने लव मैरिज की थी। उनकी पत्नी भक्ति बरुवे महाराष्ट्रीयन थीं और एक अदाकारा व दूरदर्शन की न्यूज रीडर भी।

साल 1996 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया था। उस वक्त वह घर पर आराम से बैठकर भारत बनाम श्रीलंका के विश्व कप सेमीफाइनल मैच का लाइव प्रसारण देख रहे थे। दरअसल, शफी को क्रिकेट देखना और खेलना बहुत पसंद था। मैच देखते हुए वह अचानक बेहाल हो गए। हार्ट अटैक आया और वे चल बसे। उनकी मौत के पांच साल बाद 2001 में उनकी पत्नी भक्ति भी एक कार एक्सीडेंट में चल बसी थीं।

--आईएएनएस

एमटी/डीकेपी

Share:

Leave A Reviews

Related News