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इमरजेंसी के बारे में पढ़ाना गलत बात नहीं पर इतिहास केवल एक पक्ष तक सीमित न रहे: जितेंद्र आव्हाड


मुंबई, 25 जून (आईएएनएस)। एनसीईआरटी की कक्षा 9 की पुस्तकों में इमरजेंसी से जुड़े अध्याय को शामिल किए जाने और शिवसेना (यूबीटी) सांसदों द्वारा लोकसभा स्पीकर से मुलाकात कर दल-बदल कानून के तहत बागी विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। एनसीपी (एसपी) विधायक जितेंद्र आव्हाड और शिवसेना एमएलसी नीलम गोर्हे ने इन मुद्दों पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं।

मुंबई, 25 जून (आईएएनएस)। एनसीईआरटी की कक्षा 9 की पुस्तकों में इमरजेंसी से जुड़े अध्याय को शामिल किए जाने और शिवसेना (यूबीटी) सांसदों द्वारा लोकसभा स्पीकर से मुलाकात कर दल-बदल कानून के तहत बागी विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। एनसीपी (एसपी) विधायक जितेंद्र आव्हाड और शिवसेना एमएलसी नीलम गोर्हे ने इन मुद्दों पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं।

एनसीईआरटी द्वारा इमरजेंसी पर अध्याय शामिल किए जाने के सवाल पर जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि इमरजेंसी के बारे में पढ़ाना कोई गलत बात नहीं है, क्योंकि यह देश के इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इतिहास को केवल एक पक्ष तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उन सभी घटनाओं और व्यक्तियों की भूमिका भी सामने आनी चाहिए जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन और देश के राजनीतिक इतिहास को प्रभावित किया।

आव्हाड ने कहा कि इतिहास में यह भी दर्ज होना चाहिए कि किसने ब्रिटिश शासन का समर्थन किया, किसने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया और किन लोगों ने अंग्रेजों से माफी मांगी। जनता को यह जानने का अधिकार है कि देश के इतिहास में किसकी क्या भूमिका रही। साथ ही इमरजेंसी एक गलती थी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी इसे स्वीकार किया था।

शिवसेना (यूबीटी) सांसदों द्वारा लोकसभा स्पीकर से मुलाकात कर बागी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग और स्पीकर से न्याय की उम्मीद जताने के सवाल पर आव्हाड ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा, "ओम बिरला और न्याय देंगे। बिरला और न्याय का कोई संबंध है क्या।"

वहीं, शिवसेना एमएलसी नीलम गोर्हे ने एनसीईआरटी के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि इमरजेंसी भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का ऐसा दौर था, जब तानाशाही जैसी स्थिति पैदा हो गई थी। उस समय लोगों को बिना किसी स्पष्ट कारण के गिरफ्तार किया जाता था और नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध लगाए गए थे। छात्रों को इमरजेंसी के बारे में जानकारी होना जरूरी है ताकि वे समझ सकें कि कांग्रेस सरकार के समय देश में किस प्रकार की परिस्थितियां बनी थीं। इतिहास के ऐसे अध्याय नई पीढ़ी को लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक संस्थाओं के महत्व को समझने में मदद करते हैं।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से शिवसेना यूबीटी सांसदों को न्याय की उम्मीद के सवाल पर नीलम गोर्हे ने कहा कि ओम बिरला एक अनुभवी व्यक्ति हैं और जो भी निर्णय होगा, वह नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार लिया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि स्पीकर वही फैसला करेंगे जो उचित होगा।

--आईएएनएस

पीएसके/वीसी

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