Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

मंदसौर में 40 डिग्री धूप में छतरी तानकर कलेक्टर दफ्तर के बाहर धरने पर बैठे मासूम, RTE चयन के बाद भी स्कूल ने नहीं दिया था प्रवेश


मंदसौर जिले से एक झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां शिक्षा के अधिकार (RTE) कानून के तहत निजी स्कूल में चयन होने के बावजूद प्रवेश न मिलने से परेशान मासूम बच्चे अपने माता-पिता और जिला पंचायत सदस्य के साथ कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। करीब 40 डिग्री के झुलसा देने वाले तापमान और चिलचिलाती दोपहर में ये मासूम बच्चे हाथों में छतरी थामे प्रदर्शन करते रहे। पूरा मामला शहर के प्रतिष्ठित सेंट थॉमस स्कूल में नर्सरी दाखिले से जुड़ा है, जहां प्रबंधन पर आरोप है कि उसने सरकारी योजना के तहत चयनित बच्चों को एडमिशन देने से साफ इनकार कर दिया।

लॉटरी में नाम आने के बाद भी किया गया इनकार प्रदर्शन कर रहे पीड़ित पालकों ने प्रशासनिक अधिकारियों के सामने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि सत्र 2026-27 के लिए शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया में उनके बच्चों का बकायदा चयन हुआ था। उनके मोबाइल फोन पर 15 अप्रैल 2026 तक संबंधित स्कूल में जाकर प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने का आधिकारिक मैसेज भी प्राप्त हुआ था। लेकिन जब पालक अपने बच्चों को लेकर सेंट थॉमस स्कूल पहुंचे, तो स्कूल प्रबंधन ने RTE के नियमों को ताक पर रखकर बच्चों को दाखिला देने से मना कर दिया। हद तो तब हो गई जब बाद में पालकों के मोबाइल पर उनका आवंटन निरस्त (कैंसिल) होने का संदेश भी आ गया, जिससे उनके सामने बच्चों के भविष्य का संकट खड़ा हो गया।

उपमुख्यमंत्री से लेकर सीएम हेल्पलाइन तक गुहार, पर नहीं मिला समाधान पालकों का आरोप है कि इस मनमानी के खिलाफ वे पिछले कई हफ्तों से दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। वे इस मामले को लेकर कलेक्टर कार्यालय, जनसुनवाई और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (181) पर कई बार लिखित शिकायतें दर्ज करा चुके हैं। इतना ही नहीं, पीड़ित परिवारों ने स्थानीय विधायक, क्षेत्रीय सांसद सुधीर गुप्ता और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा तक से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाई थी, लेकिन तमाम कोशिशों और आश्वासनों के बावजूद बच्चों को स्कूल की दहलीज लांघना नसीब नहीं हुआ। आखिरकार थक-हारकर उन्हें आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ा।

डेढ़ घंटे तक चला प्रदर्शन, समझाइश रही बेअसर मासूम बच्चे अपने माता-पिता के साथ मंगलवार सुबह करीब 11:30 बजे बैनर-पोस्टर लेकर कलेक्टर कार्यालय के मुख्य द्वार के बाहर जमीन पर बैठ गए। दोपहर की भीषण गर्मी में बच्चों की ऐसी हालत देखकर प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंचे तहसीलदार, एसडीएम और अपर कलेक्टर ने पालकों को समझाने और मौखिक आश्वासन देकर धरना समाप्त कराने की पुरजोर कोशिश की, लेकिन आक्रोशित पालक कलेक्टर से सीधे ठोस कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे और प्रदर्शन जारी रखा।

कलेक्टर का बड़ा फैसला: अब ऑफलाइन कराई जाएगी RTE प्रवेश प्रक्रिया धरना शुरू होने के करीब डेढ़ घंटे बाद, दोपहर 1:15 बजे स्थिति को भांपते हुए कलेक्टर ने जिला पंचायत सदस्य दीपक सिंह गुर्जर और कुछ प्रमुख पालकों को चर्चा के लिए अपने चेंबर में आमंत्रित किया। करीब आधे घंटे तक चली इस उच्च स्तरीय बैठक के बाद जिला पंचायत सदस्य ने बताया कि कलेक्टर ने इस संवेदनशील मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। कलेक्टर ने साफ किया है कि अब इस मामले में RTE प्रवेश प्रक्रिया को ऑनलाइन के बजाय ऑफलाइन मोड पर कराया जाएगा, ताकि तकनीकी खामियों या स्कूलों की मनमानी को रोका जा सके।

10 दिन का मांगा समय, आश्वासन के बाद खत्म हुआ धरना दीपक सिंह गुर्जर के मुताबिक, बैठक के दौरान कलेक्टर ने प्रभावित स्कूलों की सूची का अवलोकन किया और इस पूरी गड़बड़ी को ठीक करने के लिए करीब 10 दिन का समय मांगा है। प्रशासन की ओर से पालकों को पुख्ता आश्वासन दिया गया है कि तय समय सीमा के भीतर संबंधित स्कूलों में हर हाल में RTE योजना के अंतर्गत बच्चों को प्रवेश दिलाया जाएगा। प्रशासन से ठोस और लिखित भरोसा मिलने के बाद, दोपहर करीब पौने दो (1:45) बजे पालकों ने अपना धरना समाप्त किया। हालांकि, पालकों ने चेतावनी दी है कि यदि 10 दिनों में बच्चों का एडमिशन नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

Share:

Leave A Reviews

Related News