
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और उसके वैश्विक प्रभावों के बीच भारत सरकार ने स्थिति पर व्यापक चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई है। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब क्षेत्र में जारी संघर्ष का असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता पर पड़ रहा है।
इससे पहले, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश की सुरक्षा तैयारियों का आकलन करने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में जनरल अनिल चौहान, एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह, जनरल उपेंद्र द्विवेदी, एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी और समीर कामत सहित वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मौजूद रहे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संसद में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि सरकार मौजूदा हालात से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने स्थिति को “बेहद चिंताजनक” बताते हुए सभी आवश्यक कदम उठाने का भरोसा दिया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के नए नेतृत्व और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बातचीत की संभावनाएं सामने आई हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने भी हाल में दावा किया कि दोनों देशों के बीच युद्धविराम को लेकर सकारात्मक बातचीत चल रही है, हालांकि तेहरान ने ऐसी किसी भी वार्ता से इनकार किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर तेल की कीमतों, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में भारत सरकार की यह पहल देश की सुरक्षा और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए अहम मानी जा रही है।
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