
मुंबई के बॉम्बे एग्जिबिशन सेंटर में तीन दिवसीय 'इंडिया केम 2026' के 14वें संस्करण का उद्घाटन गुरुवार को हुआ। इस वर्ष 'एडवांटेज भारत – एन इमर्जिंग ग्लोबल केमिकल्स हब' थीम पर आयोजित इस सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य को रसायन एवं पेट्रोकेमिकल उद्योग के प्रमुख 'ग्लोबल हब' के रूप में स्थापित करने के संकल्प को दोहराया। उन्होंने देश-विदेश के उद्योगपतियों को सुरक्षा, पारदर्शी व्यवस्था और उद्योग अनुकूल नीतियों का भरोसा देते हुए जनवरी 2027 में होने वाली 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट' (GIS) के लिए आमंत्रित किया। सम्मेलन में मध्य प्रदेश सहित गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल स्टेट पार्टनर्स के रूप में शामिल हुए हैं।
सत्र में केंद्रीय स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि भारत की पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री का मौजूदा आकार 220 बिलियन डॉलर है, जिसे वर्ष 2040 तक 1 ट्रिलियन डॉलर और विकसित भारत 2047 तक 1.6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इस दिशा में केंद्र सरकार प्रत्येक 'भव्य रसायन पार्क' को 1000 करोड़ रुपये की सहायता दे रही है और एडवांस्ड केमिकल व पेट्रोकेमिकल रिसर्च के लिए एक लाख करोड़ रुपये का फंड तैयार किया जा रहा है। कार्यक्रम को केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने भी संबोधित किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रेखांकित किया कि सागर जिले का बीना शहर पेट्रोकेमिकल उद्योग का नया केंद्र बनकर उभर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा यहां 50 हजार करोड़ रुपये की लागत से डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल यूनिट का भूमि-पूजन किया जा चुका है, जहां प्रतिवर्ष 22 लाख टन से अधिक उत्पाद तैयार होंगे। साथ ही बीपीसीएल की 49 हजार करोड़ रुपये की एथिलीन क्रैकर एवं रिफाइनरी विस्तार परियोजना भी मध्य भारत में नए अवसर सृजित कर रही है। मुख्यमंत्री ने इंडियन ऑयल, रिलायंस और हल्दिया पेट्रोकेमिकल्स जैसी दिग्गज कंपनियों से बीना के निकट पॉलिमर प्रसंस्करण और वितरण की संभावनाएं तलाशने का आह्वान किया।
एमएसएमई सेक्टर को सशक्त करने के लिए राज्य में मजबूत क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में रायसेन के तामोट में 121 एकड़ और ग्वालियर के बिलौआ में 93 एकड़ में अत्याधुनिक प्लास्टिक पार्क स्थापित किए गए हैं। तामोट में सिपेट का उन्नत प्लास्टिक उत्पाद मूल्यांकन केंद्र भी संचालित है। इसके अलावा धार में विकसित हो रहा 'पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क' वस्त्र के साथ-साथ पॉलिमर व केमिकल इकाइयों को गति देगा। वहीं विजयपुर में गेल का आधुनिक गैस ढांचा और 10 मेगावाट का ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र, सीहोर के आष्टा में गेल की परियोजना तथा नागदा में ग्रासिम इंडस्ट्रीज का परिसर प्रदेश की मजबूत औद्योगिक क्षमता को प्रदर्शित करते हैं।
मुंबई प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों के साथ सीधी बैठकें कर विभिन्न सेक्टर्स में नए निवेश प्रस्तावों पर चर्चा की। भीलोस इंडस्ट्रीज के सीएमडी रमेशचंद्र तेजराज जैन के साथ धार के पीएम मित्र पार्क और भैसोला में लगभग 7,500 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश और 3,750 रोजगार सृजन पर विमर्श हुआ। वहीं सितारे यूनिवर्सिटी के संस्थापक डॉ. अमित सिंघल के साथ देवास के निकट 40 एकड़ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटर साइंस केंद्रित आवासीय विश्वविद्यालय परिसर स्थापित करने की योजना पर संवाद किया गया।
उर्वरक एवं रसायन क्षेत्र में मध्य भारत फॉस्फेट प्राइवेट लिमिटेड के सीएमडी पुनीत गोपीकिशन मखारिया के साथ मेघनगर में 350 करोड़ रुपये की एकीकृत उर्वरक परियोजना तथा पूर्वी मध्य प्रदेश में 700 करोड़ रुपये के निवेश से नई इकाई लगाने पर चर्चा हुई। फार्मास्यूटिकल सेक्टर में ल्यूपिन लिमिटेड के प्रतिनिधि के. आर. गुप्ता से मंडीदीप और पीथमपुर में मौजूदगी के विस्तार और 350 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश से जुड़ी बल्क ड्रग परियोजना पर बातचीत हुई। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने एमपीआईडीसी द्वारा लगाई गई राज्य की औद्योगिक संभावनाओं पर केंद्रित प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया।
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