
नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व ऊर्जा सचिव और नोबेल पुरस्कार विजेता स्टीवन चू ने परमाणु ऊर्जा को भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए अनिवार्य बताया है। उन्होंने चेतावनी दी कि वर्तमान भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक ईंधन बाजार की कमजोरियों को उजागर कर रहे हैं। चू के अनुसार, परमाणु ऊर्जा एक स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करती है। यह प्राकृतिक गैस की तुलना में कहीं अधिक टिकाऊ और दीर्घकालिक विकल्प है।
स्टीवन चू ने भारत द्वारा विकसित किए जा रहे ब्रीडर रिएक्टरों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि ये 'फास्ट टर्म रिएक्टर' पारंपरिक रिएक्टरों के मुकाबले ईंधन का बेहतर उपयोग करते हैं। हाल के यूक्रेन और ईरान युद्धों ने घरेलू ऊर्जा सुरक्षा के महत्व को बढ़ा दिया है। चू ने जोर दिया कि अपनी सीमाओं के भीतर ऊर्जा उत्पादन करना अब किसी भी देश के लिए सबसे जरूरी हिस्सा बन गया है।
परमाणु कचरे के निपटान पर चू ने कहा कि यह एक हल होने वाली समस्या है। उन्होंने ऑयल ड्रिलिंग तकनीक के जरिए जमीन के काफी नीचे बोरहोल बनाकर कचरा जमा करने का सुझाव दिया। इसके अलावा, उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां रिएक्टर बजट और समय पर पूरे हो रहे हैं। भारत को भी एक ही कुशल टीम का बार-बार उपयोग करके निर्माण प्रक्रिया में तेजी लानी चाहिए।
एक इंटरव्यू के दौरान चू ने कहा कि भविष्य में दुनिया की दिशा तय करने में भारत, चीन, अमेरिका और ईयू जैसे बड़े देशों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। भारत वर्तमान में दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते ऊर्जा उपभोक्ताओं में से एक है। देश अपनी आयात निर्भरता कम करने के लिए रिन्यूएबल और न्यूक्लियर पावर के मिश्रण पर तेजी से काम कर रहा है।
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